न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 क्या है जानिए- किसान और कृषि पर प्रभाव

न्यूनतम समर्थन मूल्य सूची | न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ | न्यूनतम समर्थन मूल्य के नकारात्मक प्रभाव | minimum support price | न्यूनतम समर्थन मूल्य का उधेश्य | न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत आने वाली फसले |

कृषि करना एक जोखिम भरा व्यवसाय है, किसानों को बुवाई से लेकर अपने उत्पादों को बाजार मे बेचने तक का सफर मे काफी जोखिमों का सामना करना पड़ता है | सन 1965 मे सर्वप्रथम CACP (Commission For Agricultural) द्वारा सबसे पहले गेहू पर MSP लागू किया गया था | न्यूनतम समर्थन मूल्य वह बिक्री कीमत है जो केंद्र सरकार विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए फसल की बुवाई से ठीक पहले निर्धारित की जाती है | न्यूनतम समर्थन मूल्य(minimum support price) एक प्रयास है केंद्र सरकार का जिसमे किसान और कृषि क्षेत्र को लाभदायक बनाना है |

न्यूनतम समर्थन मूल्य
न्यूनतम समर्थन मूल्य

न्यूनतम समर्थन मूल्य का उधेश्य minimum support price ka udheshya ?

  • सरकार किसानों के फसल उत्पादो के मूल्यों को घाटे से बचाना है,और तय मूल्य पर सभी उत्पादों खरीदने के लिए सरकार तैयार रहना |
  • जन वितरण और सुरक्षित भंडार प्रणाली के लिए व्यवस्था बनाए रखना |
  • किसानों को फसल बेचने का निश्चित माहोल देना है |
  • खेतों मे फसल बोने से पहले किसान को सूचित कर देना की कम से कम क्या भाव मे बिकेगी |
  • फसलों मूल्यों को मजबूत खरीद नीति से जोड़ना है |

किसान अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कैसे बेचे ?

केन्द्र ने वर्ष 2020-21 के लिए गेहूं खरीद का एमएसपी 1935 रुपये प्रति क्विंटल निधारित किया है. किसानों को गेहूं बेचने के लिए खाद्य विभाग के पोर्टल www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेसन कराना होगा |

न्यूनतम समर्थन मूल्य 2020-21 किसान जनसुविधा केन्द्र(csc), साइबर कैफे, या खुद से इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं |

कैसे तय होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य(minimum support price) ?

  • किसी भी फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक का कुल लागत और उसमे कुछ लाभ जोड़कर तय किया जाता है |
  • msp का निर्धरण कृषि उपकरणों ,खाद ,बीज,मेहनत और उत्पादित फसल की कीमत के आधार पर किया जाता है |
  • msp बाजार मे फसल का उपभोग एव उत्पादन के समानता के आधार पर |
  • कृषि उत्पाद की अन्तराष्ट्रीय बाजार मूल्य एव लोकल बाजार के आधार पर |
  • एम.एस. स्वामीनाथन की सलाह थी की msp का निर्धारण किसानों को लागत का 50% और जोड़कर दिया जाए ,पर इस बात का कोई अमल नहीं हुआ आज तक |
न्यूनतम समर्थन मूल्य
न्यूनतम समर्थन मूल्य

minimum support price का किसानों और कृषि पर प्रभाव ?

  • देश मे ifc खरीद केंद्रों की भारी कमी है और
  • जब फसल कटाई के समय होता है तब मंडियों मे भारी भीड़ हो जाती है |
  • खरीद केंद्रों की कमी के कारण किसान अपनी फसलों कोmsp मे बेच नहीं ककते है |
  • सरकारी केंद्र गावों से काफी दूर है, जिससे परिवहन का खर्च ज्यादा हो जाता है |
  • msp की हकीकत तो ये है की किसानों को msp से कम कीमत पर फसलों को बेचना पद जाता है है |
  • msp के मूल्यों मे होने वाली वर्धी दर भी कम है साल 2013 से 2017 तक केवल 3.6 % की गई |
  • बाजार और मंडिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही अनाजों की खरीद चालू कर देती है |
  • बहुत बार किसानों को msp के बराबर भी कीमत नहीं मिल पाती है |
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा होती तब से ही बाजार और मंडिया उस मूल्य को ही बाजार मूल्य मान लेती है |
  • कम कीमत के कारण किसान सड़कों पर फसलों को फेकना ,किसान आंदोलन करना जैसी घटना होती है |
  • यह मूल्य केवल चावल और गेहू के लिए ही ज्यादा प्रभावी है बाकि सब उत्पादों पर केवल संकेत मात्र है |

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न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत आने वाली फसले ?

वर्तमान मे देश मे कुल 25 फसलों पर MSP की घोषणा की जाती है –

  1. अनाज(कुल 7 ) – गेहू ,मक्का ,ज्वार ,बाजरा ,जौ ,रागी, धान(चावल) |
  2. दाल (कुल 5 )- चना ,तुर ,उड़द ,मसहूर ,मूंग |
  3. तिलहन (कुल 8 )- मूंगफली ,सरसों ,सोयाबीन ,सीसम ,सूरजमुखी ,तोरया ,नाइजर सीड़ ,कुसुम |
  4. व्यापारिक /नगदी फसले (कुल 5 ) -गन्ना ,सूत ,जुट,नारियल-गिट ,vft |

कुल 25 प्रकार के कृषि उत्पाद है जिन पर MSP की घोषणा केंद्र सरकार cacp के माध्यम से करती है |

– R.Kumawat

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