[ मेथी की खेती 2022 ] जानिए कसूरी मेथी की खेती कैसे करें – मेथी की उन्नत किस्में, खरपतवार नाशक दवा

Last Updated on June 30, 2022 by [email protected]

मेथी की खेती का समय | methi ki kheti | मेथी का बीज बुवाई का तरीका | कसूरी मेथी की खेती कैसे करें | मेथी की उन्नत किस्में | मेथी में खरपतवार नाशक दवा | मेथी में लगने वाले रोग

मेथी की खेती पूरे भारतवर्ष में की जाती है, इसका उपयोग आयुर्वेद दवाइयां एवं भारतीय रसोई घरों में स्वाद को बढ़ाने के लिए इसकी पत्तियों और बीजों का उपयोग कर काम में लिया जाता है| सब्जियों में केवल पत्तियों का प्रयोग किया जाता है, इसके साथ ही बीजो का प्रयोग मसालों के रूप में किया जाता है|

मेथी-की-खेती-कैसे-करें
मेथी की खेती कैसे करें

Methi ki kheti मुख्यरूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में की जाती है | इसमे बात करेंगे मेथी की उन्नत खेती, अनुकूल समय, तापमान जलवाऊ, मेथी का बाजार भाव/रेट, लागत मेथी की खेती कैसे करें आदि के बारे मे तो किसान भाई आप पूरा देखे –

मेथी की खेती कैसे करें पूरी जानकारी ?

किसान भाइयों किसी भी प्रकार की खेती पूर्व योजना, बाजार की जानकारी आदि के साथ ही करना चाहिए | खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए किसान को बाजार भाव, बाजार में मांग, खेती में प्रयुक्त साधन, खर्चा आदि को ध्यान में रखकर करना चाहिए जिससे खेती में लागत कम और मुनाफा मिले | आज हम एक-एक करके मेथी की उन्नत खेती के बारे में जानकारी-

जलवायु और भूमि

मेथी की खेती के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है | मेथी शरद ऋतु की फसल है, इसका उत्पादन रबी की फसल में किया जाता है, यह अधिक वर्षा वाले स्थानो पर कम उगाई जाती है I मेथी के लिए दोमट एवं बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है, उतम जल निकास का प्रबंध होना आवश्यक है, मेथी खेती के लिए भूमि का पी.एच. 6 से 7 होना चाहिए |

मेथी की उन्नत किस्में ?

मेंथी की उन्नतशील प्रजातियां जैसे कि –

  • पूसा अर्ली बंचिंग
  • कसूरी मेंथी
  • लेम सेलेक्सन1
  • राजेंद्र क्रांति
  • हिसार सोनाली
  • पंत रागनी
  • एम् एच-103
  • सी.ओ-1
  • आर.ऍम टी-1 एवं आर.ऍम टी-143 आदि है|

खेत की तैयारी कैसे करें ?

खेत की तैयारी में पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद खेत की दो-तीन अच्छी जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके, खेत में पाटा लगाकर समतल एवं भुरभुरा बना लेना चाहिए I मेथी की फसल के लिए खेत तैयारी के समय जहा तक हो सके ज्यादा-से-ज्यादा जैविक खाद का ही प्रयोग करना चाहिए| खेत की आख़िरी जुताई में 100 से 150 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी गोबर खाद को मिला देना चाहिए|

मेथी की बुवाई कैसे करें?

इसकी बुवाई छिटकवा विधि से भी की जाती है, लेकिन बुवाई लाइनो में ही करनी चाहिए, लाइन से लाइन की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर एवं मेथी के पौधे से पौधे की दूरी 5 से 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए|

मेथी बीज की बुवाई –

मेंथी की बुवाई में बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर कितनी लगती है तथा बीज शोधन किस प्रकार से करना चाहिए इसके लिए किसान को मेथी की बुवाई में 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज लगता है, कसूरी मेंथी की बुवाई में मात्र 20 किलोग्राम ही बीज प्रति हेक्टेयर लगता है|

बीजशोधन मे थीरम 3 ग्राम प्रति किलोग्राम या बेविस्टीन 2 ग्राम या सेरोसेन या केप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज उपचारित कर बुवाई करनी चाहिए|

मेथी बोने का सही समय क्या है?

मेंथी की बुवाई सितम्बर से लेकर अक्टूबर तक की जाती है, फिर भी देर होने पर नवम्बर के दूसरे सप्ताह तक की जा सकती है |

मेथी की खेती कैसे करें

मेथी में कौन सी खाद डालनी चाहिए?

सड़ी गोबर की खाद 5 से 10 कुंतल प्रति हेक्टेयर खेत की तैयारी के समय आख़िरी जुताई मे देनी चाहिए | यदि खेत की भूमि कम उपजाऊ है तो इसके साथ ही 40 किलोग्राम नत्रजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस तथा 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर तत्व के रूप में देना चाहिए |

फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा खेत की तैयारी करते समय बेसल ड्रेसिंग में तथा नत्रजन की आधी मात्रा दो भागो में टॉप ड्रेसिंग में देना चाहिए| पहली बार 25 से 30 दिन के बाद तथा दूसरे 40 से 45 दिन बुवाई के बाद मेथी की खड़ी फसल में शेष आधा -आधा करके देना चाहिए|

मेथी में खरपतवार नाशक दवा ?

यदि खेत में खरपतवार अधिक उगते है, तो बुवाई के बाद 1-2 दिन के अंदर 30 प्रतिशत पेंडीमेथलीन 3.3 लीटर को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए, जिससे कि खरपतवारो का जमाव ही न हो सके |

मेथी की फसल में निराई-गुड़ाई कब करनी चाहिए तथा खरपतवार नियंत्रण किस प्रकार से करना चाहिए इन बातों का भी विशेष ध्यान रखना होता है |

पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद तथा दूसरी पहली के 30 दिन बाद की जाती है |

मेथी में लगने वाले रोग और प्रबंधन –

यदि किसान व्यापार की द्रष्टि से खेती करता है तो मेथी की फसल में कौन-कौन से रोग लगते है तथा उनका नियंत्रण कैसे करना चाहिए इन बातों पर सचेत रहना है |

पत्तियों पर भभूतिया रोगयह रोग मुख्यतः रस चूसक किट और फफूंद के प्रकोप से फैलता है | निवारण के लिए हेक्जकोनोजोल 5% EC 250मिली + एमिंडाक्लोप्रिड 20 SL 100 मिली / एकड़ के हिसाब से छिडकाव कर सकते है |
किट इल्ली का प्रकोपप्रोफोनोफास और इमामेक्टिन बेन्जोयेंट की अनुपात मात्रा में घोलकर छिडकाव कर सकते है |
पाउड्री मिल्ड्यू रोगपाउडर प्रकार का फफूँद से होने वाला एक गंभीर रोग है |
लीफ स्पॉट छोटे, गोल, पीले सूखे हुए धब्बे पत्तियों की ऊपरी तरफ़ फैलने लगते है |
अन्य मेथी में उकठा रोग, डैपिंग आफ, डाउनी मिल्ड्यू तथा ब्लाइट बीमारी भी लगती है |

रोग नियंत्रण करने हेतु बीज शोधन करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए| मेथी में मिल्ड्यू के नियंत्रण हेतु सल्फर पाउडर 5 प्रतिशत का 15 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर के हिसाब से डस्टिंग करनी चाहिए तथा डाउनी मिल्ड्यू हेतु 1 प्रतिशत बोर्डोमिक्सचर का छिड़काव करना चाहिए |

मेथी-की-खेती-कैसे-करें
मेथी की खेती कैसे करें

मेथी की फसल में कौन-कौन कीट लगते है तथा उनका नियंत्रण कैसे करे?

मेथी में पत्ती का गिडार, पॉड बोरर तथा माहू कीट लगते है, इनका नियंत्रण 0.2 प्रतिशत कार्बेरिल या इकोलेक्स 0.05 प्रतिशत या मैलाथियान 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के साथ घोलकर छिड़काव करना चाहिए|

मेथी की फसल में कटाई कब करे ?

मेथी की कटाई किसान की जरूरत के हिसाब से जैसे बीज उत्पादन तथा हरी पत्तिया मंडी हेतु कर सकता है वो भी नीचे दिए गए अनुसार|

कभी-कभी केवल बीजोत्पादन हेतु ही फसल उगाई जाती है, ऐसी दशा में पत्तियो की कटाई नहीं की जाती है या केवल एक बार ही कटाई करते है|

जब फसल केवल पत्ती कटिंग के लिए उगाते है, उस दशा में 4-5 पत्ती कटिंग की जाती है, इसके बाद फसल खत्म कर देते है| बीज हेतु: फसल जब मार्च में पककर खेत में ही सूख जाती है, तभी कटाई की जाती है और कटाई के बाद मड़ाई करके बीज अलग कर लिए जाते है|

मेथी फसल की पैदावार?

फसल जब केवल पत्ती प्राप्त हेतु बुवाई की जाती है, तो 90 से 100 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उपज होती है यदि फसल पत्ती और बीज दोनों के लिए उगते है, तो 2 से 3 पत्ती कटिंग से 15 से 20 क्विंटल पत्ती तथा बाद में 8- 10 क्विंटल बीज प्राप्त होता है, जब केवल बीज प्राप्त करने हेतु फसल उगाई जाती है, तो 12 से 15 क्विंटल बीजोत्पादन होता है|

मेथी की खेती से कमाई और बाजार भाव ?

देश का किसान मेथी की खेती करके अच्छी कमाई और आमदनी प्राप्त कर सकता है इसके लिए किसान को बाजार मांग और भाव, खेती में लागत, खेती करने का तरीका आदि निर्भर करते है |
औसतन कमाई की बात करें तो किसान 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर शुद्ध कमाई कर सकता है और यदि किसान मेथी की पत्तियों को सुखाकर बाजार में बेचे तो 100 से150 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव आसानी से मिल जाते हैं |

Leave a Comment

error: Alert: Content is protected !!