[ रिजका की खेती 2022 ]  जानिए रिजका का बीज का भाव, प्रमुख किस्में, फायदे, खेती कैसे करें – rijka grass ki kheti

Last Updated on July 22, 2022 by [email protected]

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देश के कई प्रगतिशील किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं और पशुओं के लिए गर्मी के मौसम में हरे चारे की आवश्यकता होती है | हरे चारों की प्रमुख वैरायटीयों के बारे में बात करें तो रिजका फसल भी काफी किसानों की पहली पसंद और पशुओं में बड़े चाव से खाई जाने वाली चारा फसल है | रिजका एक प्रकार से रबी के मौसम में उगाई जाने वाली बहुकटाई और बहुवर्षीय हरा चारा फसल है, जिसको अधिकतर सिंचित साधनों के आधार पर करते हैं –   

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रिजका चारा क्या है ?

यह फसल मुख्य रूप से उच्च क्वालिटी और स्वादिष्ट मीठा चारा होता है जो गर्मी के समय के अलावा पूरे साल भर पशुओं को खिलाने के काम में आता हैं | इस फसल को एक बार बोने के बाद 4 से 5 वर्ष तक अच्छी उपज ले सकते हैं | इसकी जड़ें अधिक गहराई तक जाती है, जिसके कारण सर्दी-गर्मी-ठंडी-बरसात सभी मौसम को सहन करने में सक्षम है और लगातार अच्छी उपज देती रहती हैं | इस फसल की खास बात यह है कि यह भूमि की उर्वरा शक्ति को लगातार बढ़ाती है –

रिजका की फसल बुवाई का समय ?

10 अक्टूबर से अंतिम नवम्बर के दिनों में बुवाई के लिए सबसे उत्तम और अच्छा समय माना जाता है |

शुष्क जलवायु वाले प्रदेशों में यह अच्छी प्रकार से फलती फूलती है इसकी बीज बुवाई का समय अक्टूबर से लेकर नवम्बर तक इसकी बुवाई पूरी कर सकते हैं | यहां फसल अधिकतम 30 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान सहन कर सकती है | फसल एक बार जड़ पकड़ लेने के बाद यह गहराई में चली जाती है जिससे पूरे साल भर का तापमान सर्दी, गर्मी, बरसात सभी प्रकार के मौसम को सहन कर लेती है |

रिजका की किस्म ?

सबसे पहली प्राथमिकता आपके क्षेत्र में होने वाली या फलने फूलने वाली किस्मों को ही प्राथमिकता दें इसके साथ ही अनेक प्रकार की उन्नत किस्में हैं जो भारत में अच्छी मांग के साथ अच्छा उत्पादन दे रही है-

रिजका की उन्नत किस्मेंमेसासिरसा
सिरसा 9
टाइप 8 
आर एल 88 
सिरसा 8
लर फार्म
सोनारा यूनिको
रेम्बलर
वर्नल
एल एल सी 3- वार्षिक
इगफ़ी -244
एन डी आर आई सिलेक्शन 11
क्यूगा
सेरेनाक आदि है |
रिजका की खेती
रिजका की खेती

रिजका की खेती कैसे की जाती है?

अच्छी पैदावार के लिए दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट, चिकनी मिट्टी तथा अच्छे जल निकास वाले उपजाऊ जीवाश्म युक्त मिट्टी अच्छी मानी जाती हैं |

रिजका खेत की तैयारी – यह फसल एक बार लगाने के बाद 3 से 5 वर्ष तक चलती है इसलिए खेत की तैयारी बीज बुवाई से 1 माह पहले ही अच्छी प्रकार तरह से होनी आवश्यक है| इसके लिए दो से तीन बार हल/ कल्टीवेटर की सहायता से गहरी जुताई करवा लेनी चाहिए | उसके बाद रोटावेटर की सहायता से मिट्टी की अच्छी पल्टी करके समतल करवा लेनी चाहिए – पहले जुताई के समय 30 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पकी हुई गोबर की खाद मिला देनी चाहिए | तैयार खेत में क्यारी विधि द्वारा समतलता के आधार पर क्यारिया बना देना चाहिए |

रिजका बीज की मात्रा ?

बुवाई छिडकाव विधि में रिजका का बीज 25 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगता है | जबकि सीड ड्रील मशीन के द्वारा अगर बिजाई की जाए तो 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है | बीज ज्यादा गहराई में नहीं होना चाहिए, बीच की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर उपयुक्त मानी जाती है |

ध्यान रखें – इसका बीज थोड़ा कठोर होता है इसलिए बुवाई से पहले 6 से 8 घंटे तक भिगोकर रखें फिर हल्का सुखाकर सीधी बुवाई या छिड़काव विधि से बिजाई कर सकते हैं |

रिचका फसल में खाद- उर्वरक ?

यह एक प्रकार से हरा चारा फसल है इसलिए इस फसल को कैल्शियम, फास्फोरस, पोटाश की प्रचुर मात्रा वाली भूमि की आवश्यकता होती है, इसलिए इन तत्वों की पूर्ति के लिए संबंधित खाद का प्रयोग कर सकते हैं | शुरुआती समय  यानी बीज बुवाई के समय 15 किलोग्राम नाइट्रोजन 100 किलोग्राम फास्फोरस 30 किलोग्राम पोटाश उर्वरक की मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से आवश्यकता होती हैं |

रिजका फसल को शुरुआत में दो से तीन बार नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, जिसमें पहली कटाई और दूसरी कटाई के बाद 10 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से देना चाहिए | बाद में जड़े गहरी चली जाने के बाद इसमें नाइट्रोजन देने की आवश्यकता नहीं होती है, सिंचाई के सहारे लगातार 3 से 5 साल तक उपज देती रहती है |

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रिजका फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और कीट ?

प्रमुख लगने वाले रोगलक्षण और रोकथाम 
मृतु रोमिल आसिता रोगयह रोग मुख्यतः सितंबर से लेकर दिसंबर के माह के बीच में देखने को मिलता है जो अधिक नमी के कारण होता है | इस रोग के रोकथाम के लिए मैनकोज़ेब के घोल का छिड़काव कर सकते हैं और हर 10 दिन के अंतराल में दो से तीन बार छिड़काव करने पर रोक सकते हैं | ध्यान रखें – छिड़काव के बाद 15 से 20 दिन बाद में ही इस चेहरे को खिलाना चाहिए |
मोयला /चैपा रोगफरवरी लास्ट से लेकर मार्च-अप्रैल में देखने को मिलता है पौधों पर छोटे-छोटे किट छा जाते हैं | इस रोग के रोकथाम के लिए 1 लीटर मेलाथियान 50 ई सी का प्रति हेक्टेयर की दर से कर सकते हैं |
रिजका की खेती
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रिजका का बीज का भाव rijka seeds price ?

यदि घर पर बीज उत्पादन करना चाहते हैं या बीज बनाना चाहते हैं तो इसके लिए जब फसल 2 साल से अधिक की हो जाए तब जनवरी महीने के बाद से काटना बंद कर देना चाहिए| मई तक बीज फलियां पककर तैयार हो जाती है इस अवस्था में बीज का उत्पादन लेना अच्छा उत्तम माना जाता है |

अच्छी फसल होने पर इससे अधिकतम 3 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बीज प्राप्त कर सकते हैं और अगली बुवाई के समय इन बीजों को उपचारित करके बोया जा सकता है |

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रिजका चारे के फायदे ?

  • सभी प्रकार के पशुओं को अनेक प्रकार से लाभदायक और पोस्टिक चारा माना जाता है |
  • इस चारे में प्रोटीन की 15 से 20% तक की मात्रा होती है |
  • इसकी जड़ों में राइजोबियम जीवाणु जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थितकिरण करके भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने का काम करता है |
  • इस तरह फसल को सिंचाई पानी की भी कम आवश्यकता होती है क्योंकि इसकी जड़ें काफी गहरी होती है इसलिए हर 7 दिन के अंतराल में अच्छी सिंचाई कर सकते हैं |

रिजका प्रतिवर्ष पैदावार उत्पादन ?

हर साल रिचके से 8 से 10 कटाई ले सकते हैं जिसमें प्रति हेक्टर हरा चारा 700 से लेकर 1000 क्विंटल हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं और बात करें सूखे चारे की तो 150 क्विंटल के आसपास सुखा चारा प्रति हेक्टेयर की दर से प्राप्त कर सकते हैं |

रिजका की कटाई कैसे करें ?

पहली कटाई वुवाई से 55 से 60 दिन के बाद कर सकते है | दूसरी और आगे की कटाईया 25-30 दिन के अन्तराल पर कर सकते है |

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