[ कॉफी की खेती कहां होती है 2022 ] कॉफी की खेती कैसे करें – coffee ki kheti kaise hoti hai full info

Last Updated on May 14, 2022 by krishi sahara

coffee ki kheti | कॉफी की खेती कहां होती है | कॉफी की खेती कैसे करें | coffee ki kheti kaise hoti hai

कॉफ़ी के स्वाद के साथ-साथ हर एक को यह भी जानना चाहिए की कॉफ़ी खेतों से लेकर घरों तक कैसे पहुँचती है | कॉफ़ी मुख्यतः महंगे पेय सेवन के रूप मे जानी जाती है, जो देश के दक्षिण राज्यों के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाई जाती है | आज हम बात करेंगे भारत में coffee ki kheti कहाँ-कहाँ और कैसे होती है – विस्तृत जानकारी के साथ –

कॉफी-की-खेती

भारतीय कॉफ़ी (Coffee) की गुणवत्ता बहुत अच्छी होने के कारण दुनियाभर में हमेशा मांग में रहती है |

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कॉफी की खेती कहां होती है ?

कॉफ़ी का उत्पादन भारत में मुख्यतः कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आध्रप्रदेश, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, ओड़िसा, छतीसगढ़ राज्यों से होता है | जिसमे कर्नाटक और केरल में कॉफ़ी का उत्पादन सबसे अधिक मात्रा में किया जाता है |

कॉफी की खेती कैसे करें ?

कॉफ़ी (Coffee) के पौधे एक बार लग जाने पर वर्षो तक पैदावार होती है | शुरुआत में बागान और पौधे लगाने में लागत अधिक आती है, लेकिन पैदावार और मुनाफे से सब वसूल हो जाते है | सावधानी के तोर पर किसान खेती करने से पहले अपने कॉफ़ी की खेती के बारे में प्रशिक्ष्ण लेना जरूरी माने | अच्छी किस्म के पौधो का चुनाव करें –

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कॉफी की खेती के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्त है?

कॉफ़ी (Coffee) की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ युक्त दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है, तथा ज्वालामुखी  विस्फोट से निकलने वाली लावा युक्त मिट्टी में भी इसे उगाया जाता है | इसकी खेती में भूमि का P.H. मानक 6 से 6.5 के मध्य होना चाहिए |

कॉफ़ी के लिए जलवायु और तापमान –

कॉफ़ी की खेती करने के लिए समशीतोष्ण, शुष्क और आद्र मौसम अच्छा माना जाता है | कॉफ़ी के पौधे छायादार जगह यानि बड़े पेड़ो के निचे होना बहुत उत्तम माना जाता है | इस खेती के लिए हर साल 150 से 200 सेंटीमीटर तक की वर्षा पर्याप्त होती है | नवम्बर से फरवरी( शीत ऋतू ) में पौधों का विकास रुक जाता | 

तापमान – तापमान में ज्यादा परिवर्तन होने से कॉफ़ी के पौधों का विकास तथा उपज पैदावार प्रभावित हो सकती है –

पौधों के विकास के लिए 18 से 20 डिग्री का तापमान
गर्मी के मौसम में अधिकतम 30 डिग्री
सर्दियों के मौसम में न्यूनतम 15 डिग्री
Coffee Farming In India

कॉफी की प्रमुख किस्मों की सूची –

वर्तमान में उपजाई जाने वाली कॉफ़ी में कई तरह की किस्मे पायी जाती है, जो अलग-अलग मिट्टी, जलवायु, राज्यों, किस्मों के अनुरूप उगाई जाती है –

कॉफी की प्रमुख वैरायटीकॉफी की किस्मों का विवरण, भौगोलिक पहचान और प्रमाणन
वायनाड रोबस्टा कॉफ़ी कॉपी की यह क्वालिटी अपनी अनोखी खुश्बू और मनमोहक स्वाद के लिए जानी जाती है | देश में यह केरल के उत्तरी भाग में पैदावार की जाती है, जिसकी विदेशों में मांग रहती है |
कावेरी किस्म की कॉफ़ीKaveri Variety of Coffee यह संकर किस्म है, जो टिमोर नाम से भी जानी जाती है | कावेरी किस्म के पौधों में भी अधिक फल उत्पादन क्षमता होती है |
अरेबिका कॉफ़ीयह उच्च गुणवत्ता वाली Coffee है, जो कि भारत में अच्छी मात्रा में उपजाई जाती है | देश और विदेशों के बाजार में अच्छे भावों में सालभर मांग के साथ बिकती है |
बाबाबुदन गिरीज कॉफ़ी किस्मBababudan Girries Coffee किस्म भारत के कर्नाटक राज्य में सर्वोधिक उगाई जाती है, यह किस्म स्वाद और गुणवत्ता में बहुत अच्छी होती है | इस किस्म की फसल को सुहाने मौसम में तैयार किया जाता है |
रोबेस्टा कॉफी बिना किट-रोग के साथ तैयार होने वाली यह अधिक उत्पादन वाली किस्म के रूप में प्रशिद्ध है | भारत में उपजाई जाने वाली कॉफ़ी उत्पादन का 60% हिस्सा Robusta Coffee प्रजाति का ही है |
एस 795 कॉफी (S 795 Coffee)यह हाल ही में तैयार संकर किस्म का बीज है, जिसकी पैदावार अन्य किस्म के मुकाबले 50% अधिक है| इस वैरायटी को देश के दक्षिण और दुनिया पूर्वी एशियाई देशों में अधिक लगाया जाता है |
केंट कॉफ़ीKent Coffee को देसी किस्म की कॉफ़ी भी मान सकते है, क्योकि यह भारत की सबसे प्राचीन किस्म की उपजाई जाने वाली कॉफ़ी है | इसका उत्पादन केरल राज्य में अधिक होता है|

कॉफ़ी का खेत की तैयारी?

देश में ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्रों वाले हिस्सों में इसकी खेती की जाती है | खेत या पौधे लगाने की जगह 3-4 अच्छी रोटावेटर से जुताई कर ले| खेत में रोटावेटर को चलाने के बाद 1 सप्ताह के लिए मिट्टी को हवा और धुप में पकने दें | पौधों को लगाने के लिए कम से कम 4-4 मीटर की दूरी पर गड्डो को तैयार कर लेना चाहिए |

शुरुआत में वर्मीकम्पोस्ट या गोबर खाद से खड़ो को मिटटी को तैयार करें |

कॉफी-की-खेती-कहां-होती-है

कॉफ़ी का पौधा कहाँ मिलता है ?

बड़े क्षेत्र के लिए पौध तैयारी में पौधे बीज और कलम की सहायता से तैयार कर सकते है, इसके लिए प्रशिक्ष्ण ज्ञान होना आवश्यक है| नर्सरी या सरकारी कॉफ़ी बोर्ड संस्था, कृषि विज्ञानं केंद्र से उच्च क्वालिटी से ग्राफ्टिंग विधि से तैयार पौधा मिल जाता है, इसी का प्राथमिक चुनाव करना चाहिए| कॉफ़ी का पौधों नर्सरी से खरीदते समय, ध्यान दें कि पौधा 1-2 पुराना और बिलकुल स्वस्थ हो |

कॉफ़ी के पौधों की रोपाई का समय ?

कॉफ़ी के पौधों की रोपाई का सबसे अच्छा समय बसंत ऋतू में लगाना चाहिए |  पौध लगाने के बाद सिचाई का नियमित ध्यान रखना जरुरी हो जाता है |

कॉफ़ी के पौधों की सिंचाई?

पहली सिंचाई पौधों को खेत में लगाने के तुरंत बाद कर देनी चाहिए
सर्दियों के मौसम में 15 दिन का अन्तराल काफी है |
बारिश के दिनों में पौधों को जरूरत के अनुसार
गर्मियों के मौसम में अधिक सिंचाई सप्ताह में 2 बार
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कॉफ़ी के पौधों की देखभाल कैसे करे?

  1. कॉफ़ी (Coffee) के पौधों से पैदावार लेना, देखभाल पर निर्भर करती है, इसलिए पौधे खेत में लगाने के बाद 3 से 4 वर्ष अच्छी देखभाल करते रहे है |
  2. पौधे की एक मीटर की ऊंचाई तक किसी भी शाखाओं को उगने ना दें |
  3. तेज धूप वाले स्थान पर कॉफी की खेती करना गुणवत्ता और उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है |
  4. छायादार स्थान में कॉफी की खेती करना उत्तम माना जाता है|
  5. सर्दियों का मौसम कॉफ़ी की फसल के लिए सवेदनशील/नुकशानदायी होता है |
  6. पौधो को 3-4 साल तक मजबूत और शाखा को फैलाने के लिए अच्छी सिचाई का ध्यान रखे|
  7. पेड़ो के 4 वर्ष बाद फलो की तुड़ाई शुरू, सूखी और रोग ग्रस्त डालियो कटाई-छटाई कर देनी चाहिए |
  8. कॉफ़ी उत्पादन बढ़ाने के लिए शाखाओ के विस्तार की और खाद-सिचाई का ध्यान रखना चाहिए है |

कॉफ़ी के फलों की तुड़ाई कब होती है ?

  • पौधों में फूल लगने के 5 से 6 महीने के बाद फल तुडाई के लिए तैयार हो जाते है|
  • कॉफ़ी के फलों का लाल रंग में आने पर तुडाई अच्छी क्वालिटी की मानी जाती है|
  • कई वैरायटी की तुड़ाई अक्टूबर से जनवरी के बीच की जाती है|
  • भारत की नीलगिरि क्षेत्रों में जून के महीने में तुड़ाई की जाती है |

कॉफ़ी की पैदावार और लाभ –

इस खेती / बागवानी से मुनाफे की बात करें तो कॉफ़ी की क्वालिटी, वैरायटी, बाजार में मांग के अनुसार निर्भर करती है | सामान्य तरीको में कॉफी की खेती से किसान – एक साल में प्रति एकड़ में लगभग 40 से 50 हजार रुपए तक की कमाई कर रहा है|

सभी किस्मों की उपज पैदावार अलग-अलग है, अरेबिका प्रजाति के पौधे प्रति हेक्टयेर में 900-1000 किलो के लगभग उत्पादन देते है |

कॉफी का पेड़ कितना बड़ा होता है?

कॉफी के पौधे सदाबहार पेड़-पौधो की श्रेणी में आते हैं, जो जंगली में उगने वाले कॉफी का पेड़ 10 मीटर तक लंबे/ऊंचाई में हो सकते हैं| कई कॉफी की वैरायटी है जो छोटे कद/ऊंचाई में भी होती है |

भारतीय कॉफी बोर्ड का मुख्यालय कहाँ है?

भारत का कॉफी बोर्ड मुख्यालय कर्नाटक राज्य के चिकमगलूर जिले में स्थित है | यही से देश में कॉफी उत्पादन का रिकोर्ड और खेती पर प्रचार प्रसार होता है |

कॉफी उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

भारत में कॉफी उत्पादन साल मानसून के बाद का 2021-2022
कॉफी उत्पादन – 348,500 मीट्रिक टन, इस प्रकार देश कॉफी उत्पादन में पूरी दुनिया में अपना पांचवा स्थान बनाया हुआ है |

भारत का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक राज्य कौन सा है?

देश भर में कर्नाटक राज्य में सर्वोधिक कॉफी का उत्पादन होता है जो लगभग 248,900 मीट्रिक टन के हिसाब से देश के कुल कॉफी उत्पादन का 71% पैदावार लेता है |

कॉफी कितने रुपए किलो आती है?

आम तोर पर बिकने वाली कॉफी 450/किलोग्राम के आस-पास भावों में बिकती है | डार्क ब्राउन कॉफी बीन/साबुत दाना प्रकार की 1 किलो 200 से 400 रु के आस-पास भावों में मिलती है |

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