[ हर्बल खेती क्या है 2022 ] जानिए हर्बल खेती के बारे में सम्पूर्ण जानकारी – herbal kheti in hindi

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बढती जनसख्या और घटते प्राकतिक साधन आज के समय जल्दी से बढ़ रहा है | प्राक्रतिक साधनों की मांग के पिच्छे आज के समय औश्दिय और जड़ी-बूटी वाले पेड-पौधो की मांग के साथ उधोग-धंधे का रूप लेता जा रहा है | ओषधिय पौधो में मुख्यत नीम, तुलसी , ब्राम्ही/ बेंग साग ,हल्दी , सदाबहार ,हडजोरा, करीपत्ता ,दूधिया घास , दूब घास , आंवला , पीपल , सरसों , अनार आदि है जो भरपूर गुणों से युक्त है | आइये जानते है हर्बल खेती के बारे में विस्तृत से –

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हर्बल खेती क्या है ?

जड़ी-बूटी और ओषधिय पौधो की व्यवसायिक स्तर पर खेती करना हर्बल खेती के नाम से जाना जाता है | हर्बल उत्पादों की माँग के कारण ही देश में कई उधोग विकशित हुए है और किसानों ने औषधीय पौधों और सुगंधित पौधों की खेती बड़े तोर पर करने लगे है | ओषधिय मांग वाली निकटम जगह सामान्य खेती के मुकाबले जड़ी बुटियों की खेती मे 10 गुना अधिक मुनाफा कमा सकते है |

हर्बल खेती कैसे करे ?

हर्बल खेती करने के लिए सबसे पहले खेत या मिटटी को अच्छे से तैयार कर लेना चाहिए और इसमे जैविक या गोबर युक्त खाद का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए | जड़ी बूटियों की खेती करने के लिए जड़ी बूटियों को उगाना आसान होता है, उन्हें ज्यादा देखभाल की जरूरत नही होती है | थोड़ी धूप, पानी, अच्छी मिट्टी और उर्रवरक की जरूरत होती है.जो अच्छी मात्रा में समय- समय पर मिलती रहे |

हर्बल खेती का महत्व –

हमारे शरीर और त्वचा को बिना साइड प्रभाव डाले, निरोगी बनाये रखने में औषधीय पौधों का महत्व बढ़ रहा है | भारतीय पुराणों, प्रमाणिक ग्रंथों में इसके उपयोग के अनेक साक्ष्य मिलते हैं |इन जड़ी-बूटियों के माध्यम से आज के समय आयुर्वेद दवा के साथ-साथ अग्रेजी दवाइयों में हर्बल खेती की मांग है |

औषधीय पेड़–पौधे, जड़ी-बूटियां और उनके वानस्पतिक नाम –

नीम –

नीम का पेड ठंडी छायादार और कई उपयोगी जो स्वाद में कड़वा होता है | इसकी एक टहनी में करीब 9-12 पत्ते और अधितम उचाई 20 मीटर तक की होती है | इसके फूल, फल,पत्ते, टहनिया, छिलके, जड़े, रस-पानी, बड़ी लकड़ी आदि सब अपने-अपने महत्व के कारण उपयोगी है |

तुलसी –

तुलसी एक झाड़ीनुमा पौधा है | इस पौधे के फूल, पत्ती, टहनिया, बीज, जड़े आदि घरेलू और दवा के रूप में काम में लिया जाता है | हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यह एक पवित्र पौधा है जिसकी हर एक घर-आगन में रोजाना पूजा-पाठ शुभ माना जाता है |

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हल्दी –

स्वास्थ्य की द्रष्टि से यह बूटी शरीर के लिए काफी ताकतवर साबित है | हल्दी को अलग-अलग प्रकार से तैयार कर त्वचा निखार, सौन्दर्यवर्द्धक, घाव निरोगी, रसोई मसाले, कफ-खासी नाशक आदि प्रकार से काम में लिया जाता है |

सदाबहार-

सदाबहार का पौधा चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वोधिक उपयोग होता है |इसकी उचाई 50 सेंटी मीटर तक और 8-10 टहनियों में बढ़ता है | सालभर इसके फूल सफ़ेद या बैगनी मिश्रित गुलाबी रंग में आते हैं | यह पौधा अधिकतर बगान, बलुआही क्षेत्रो, घेरों के रूप में लगया जाता है | आज के समय कॉस्मेटिक समान व दवाईयों मे भरपुर काम में लिया जा रहा है |

हदजोरा-हड्जोरा –

यह पौधा मुख्य रूप से अंगूर की बैल परिवार का ही पौधा है जो पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं | यह बूटी हड्डियों को मजबूत और टूटी हुई हड्डियों को तेजी से ठीक करने में भरपूर सहायक मानी जाती है |

करिपत्ता –

दक्षिण भारत में इस पेड़ को अधिक महत्व दिया जाता है जो ज्यादातर सभी घरों में पाया जाता है | इसका इस्तेमाल मुख्यता भोजन को स्वादिष्ट और सुंगंधित बनाने के लिए किया जाता है | दिखने में यह नीम के पेड के समान होता है |

एलोवेरा –

आज के समय एलोवेरा के बारे कौन नही जानता, जूस से लेकर जेल, क्रीम, तेल, दवा आदि में काम में लिया जा रहा है | एलोवेरा उत्पाद की बढती मांग के कारण आज कई उधोग-धंधे विकशित हो चुके है |

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दूधिया घास –

इसका उपयोग और मांग अब घट गई है, यह अधिकतर हल्की मिटटी वाले खेतो में पाई जाती है | इसकी पत्तियों के बीच छोटे-छोटे फूल होते हैं |

आँवला –

अधिक ओषधियुक्त पौधा है, जो मानव शरीर को कई प्रकार से लाभकारी साबित हुआ है | इसका प्रयोग दवाइयों, आचार, जूस, चवनप्रास, आदि प्रकार से काम में लिया जाता है | यह पेड़ व्यव्सायिक दृष्टि से बागानों में खेती की जाती है |

लेमन ग्रास –

लेमन ग्रास का उपयोग ओषधि चाय/ टी बनाने में होता है, इसके अलावा इससे निकलने वाले तेल से नींबू की खुशबू वाले साबुन, हर्बल चाय, डिओरडेंट यानी बदन की दुर्गंध दूर करने वाले पदार्थ और चमड़ा उद्योग में बदबू दूर करने में इस्तेमाल होता है |

भारत में इसकी खेती और मार्केटिंग बढ़ाने के लिए सरकार ने पिच्च्ले साल से प्रयास कर रही है जिससे – मध्यप्रदेश, उड़ीसा, छतीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों में इसका रकबा बढ़ा है | – लेमन ग्रास की खेती कैसे करे – जानिए बाजार के भाव और कीमत

सतावर की खेती –

सतावर का उपयोग कई रोगों के उपचार में जिसमे- त्वचा के रंग में सुधार, स्त्री रोग संबंधी मुद्दों का इलाज, सामान्य दुर्बलता, कमजोरी और प्रतिरक्षा आदि में उपयोगी होती है |

सतावर की खेती के लिए 10 से 15 डिग्री सल्सियस का तापमान, जुलाई से अगस्त में बुवाई, बाजार मे सतावर की जड़ो की कीमत 200 से 300 रु / किलो तक होती है |

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हर्बल खेती को सरकार का बढ़ावा ?

भारत सरकार ने ओषधि खेती को बढ़ावा देने के लिए नम्बर 2000 में “नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड” की स्थापना की थी | यह बोर्ड ओषधि खेती को बढ़ावा और व्यापार, निर्यात, प्रोसेसिंग, ट्रेनिग/प्रशिक्ष्ण व खेती के विकास से जुड़े काम करता है |

हर्बल प्लांट्स की खेती से कमाई ?

एक सामान्य किसान यदि प्रशिक्ष्ण लेकर और अच्छी मार्केटिंग के साथ खेती करता है तो, हर्बल खेती से 1 एकड़ में 10 से 25 लाख तक की खेती कर सकता है | आज के समय हर्बल खेती से जुडी-बूटी पौधे-ओषधि का मांग / व्यापार अधिक होता है जो हर्बल खेती को अधिक बड़ावा देता हैं |
हर साल भारत में ओषधि पौधों का व्यापार लगभग 8 हजार करोड़ रुपये के पार है |

देश में सर्वोधिक हर्बल खेती कहाँ होती है ?

बढती मांग के चलते – मध्यप्रदेश, गुजरात, महारास्ट्र, राजस्थान,बिहार, पशिम बंगाल, झारखंड आदि राज्यो मे ओषधि खेती अच्छी हो रही हैं |वर्तमान समय, लगभग 80% हर्बल पौधे, प्राकृतिक स्त्रोतों से प्राप्त किये जाते हैं | जबकि जंगलो के कट जाने, रिजर्व होने से इसकी बड़ती मांग को पुरा करना काफी मुश्किल हो गया है, ऐसे में अगर किसान हर्बल पौधे की खेती करते है तो अच्छा मुनाफाकमा सकता है |

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