मधुमक्खी पालन कैसे करें 2021 जानिए कहाँ है- मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र

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भारत एक कृषि प्रधान देश है समय के साथ बढ़ते हुए कृषि क्षेत्र मे अब नए-नए आमदनी के स्त्रोत बन रहे हैं | देश के किसानों का मधुमक्खी पालन की ओर रुझान बढ़ रहा है सरकारी प्रचार-प्रसार एवं प्रयासों से किसान सूचना केंद्र किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर लोन मुहैया करा रही है साथ ही सब्सिडी भी दे रही हैं |

मधुमक्खी पालन की आधुनिक विधि से मधुमक्खी पालन करना चाहते हैं तो किसान नजदीकी  कृषि कार्यालय में जाकर संपर्क कर इसमे प्रशिक्षण प्राप्त कर खेती के साथ-साथ इस प्रकार के व्यवसाय को भी चालू कर सकते हैं | तो इसमे आप जानोगे मधुमक्खी की प्रजातिया, इनके जीवन चक्र, इनकी कार्यप्रणाली एव किसान को मधुमक्खी पालन व्यवसाय के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी –

मधुमक्खी-पालन
मधुमक्खी पालन कैसे करें

हाल ही मे देश के वित्त मंत्री ने मधुमक्खी पालन और हर्बल खेती(औषधीय पौधे) मे 45,00 करोड़ रुपये इस सेक्टर मे निवेश करेंगी | साथ ही सरकारी स्तर पर गंगा नदी के किनारों पर पलदार और औषधीय पेड़-पौधे लगाए जाएंगे नदी किनारे मधुमक्खी पालन किया जाएगा |

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यदि किसान के पास पर्याप्त खुली और खेती है तो इस व्यवसाय को शुरू कर देना चाहिए | मधुमक्खी बॉक्स को किसान खेत मे, खेत की मेड, तालाब के किनारे, फूल वाली फसल के पास जैसे स्थानों पर रख सकते है | 

मधुमक्खी पालन क्या है/ मधुमक्खी पालन कैसे करें ?

मधुमक्खी पालन आजकल किसानो की आवश्यकता और आय का एक और साधन बन गया है | किसान मधुमक्खी को शहद/मधू और फसलों के परागकरण के लिए इनका पालन करते है | भारत में अधिकतर मधुमक्खी पालन में प्रयोग में लाई जाने वाली मधुमक्खी इटालियन मेलीफेरा (ऐपी-मेलीफेरा) है जो शांत सभाव की होती है जिससे पालने मे आसानी होती है | मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र से किसान इसका पूरा ज्ञान लेके इसे लधु या बड़े स्तर पर शुरू कर सकते है |

मधुमक्खी पालन को विज्ञान की भाषा मे एपीकल्चर भी कहा जाता है |

औसतन बात करें तो एक मधुमक्खी बॉक्स में 1000 से 5000 मधुमक्खियां होती है और एक बॉक्स के लिएशहद इकट्ठे करने की क्षमता यानी इनका समुचित क्षेत्र की बात करें तो दो से तीन बीघा यानि लगभग एक एकड़ भूमि के लिए एक की बॉक्स/कालोनी के लिए उचित रहता है |

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मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र / मधुमक्खी पालन कैसे करें

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मधुमक्खी पालन की लागत ?

यदि किसान मधुमक्खी पालन की आधुनिक विधि से व्यवसाय शुरू करें तो इसके लिए किसान को लकड़ी के बने बॉक्स, मुह रक्षक टोपी(जाली ), रानी मक्खी, हाथों के दस्थाने, आवश्यकतानुसार खुली भूमि,  शहद एकत्रित मशीन, आदि उपकरण/ साधन की जरूरत पड़ती है | तो मधुमक्खी पालन की लागत की बात करें तो मधुमक्खी इटालियन मेलीफेरा को अंधेरे बक्सों में रखा जाता है और यह बक्से प्रशिक्षण देने वाली कंपनियां या उधान विभाग/ कृषि विभाग से ले सकते हैं | एक मधुमक्खी पालन बॉक्स की कीमत(madhumakkhee paalan boks prais) लगभग 4 से ₹5000 होती है जो एक पूरा बॉक्स सेट होता है जिसमें स्टैंड, अंदर की जालियां आदि के साथ पूरा सेट होता है | शहद तैयार होने के बाद किसान शहद निष्कासन (शायद इकट्ठा करने की प्रक्रिया)वाली मशीन में इन छत्तों से शहद निकाल सकते हैं जो आसान सी प्रक्रिया है |

मधुमक्खी जीव के प्रकार/ मधुमक्खी कितने प्रकार की होती है ?

 शहद इकट्ठा करने के लिए मधुमक्खी परिवार में  तीन प्रकार की मधुमक्खियां पाई जाती है-

  • रानी मधुमक्खी
  •  नर मधुमक्खी
  •  वर्कर मधुमक्खी श्रमिक
मधुमक्खी पालन कैसे करें

मक्खी पालन में उपयोग में आने वाली मधुमक्खियां तीन प्रकार की होती है जो अंधेरे में रहना पसंद करती है | उसके लिए लकड़ी के विशेष प्रकार के बॉक्स बनाए जाते हैं जिनमें दोनों और छोटे छिद्र रखे जाते हैं इनसे मधुमक्खियां का आवागमन बना रहता है | और बाकी चारों तरफ से ढका रखा हुआ रहता है ताकि बॉक्स मे अंधेरा बना रहे |

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मधुमक्खी पालन पर सरकारी प्रयास और सहायता ?

सरकार  प्रति मधुमक्खी पालन बॉक्स पर लगभग 40% सब्सिडी भी देती है | सरकार इस प्रकार की योजना पर विशेष प्रकार से कार्य कर रही है क्योंकि यह फसलों के फ्लोरिंग प्रकरण का कार्य करती है जिससे फसलों का उत्पादन बढ़े सरकार का प्रयास यही है कि हर खेत में एक बॉक्स स्थापित हो | क्योंकि पहले पर्यावरण और किसान बहुत ही प्रकृति के अनुकूल खेती बाड़ी करता था लेकिन वर्तमान में खाद बीज रूप में तथा आधुनिक के क्षेत्र में आज आने पर फसलों के उत्पादन में काफी भारी नुकसान पहुंचा है |

इसलिए सरकार जैविक और किसान की लागत को कम करने के लिए परंपरागत तरीकों को अपना रही है जिसमें केंचुआ खाद, जैविक खाद, मधुमक्खी पालन आदि प्रकार के प्रयास आते हैं | किसानो की लगन और सरकारी प्रयासों से आज भारत, विश्व मे शहद के उत्पादन मे 5 वा स्थान पर है | 

मधुमक्खी-पालन
मधुमक्खी पालन कैसे करें

मधुमक्खी पालन में प्रमुख सावधानियां / मधुमक्खी पालन कैसे करें ?

  • किसान को इस प्रकार का कृषि व्यवसाय शुरू करने के लिए सर्वप्रथम मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण जरूर लेना चाहिए |
  • मधुमक्खी पालन के लिए निर्धारित योजना होनी चाहिए इनको किसान पूरे साल मधुमक्खियों को भोजन, वातावरण, फूल-फसल की समुचित व्यवस्था हो |
  • मधु मक्खी पालन व्यवसाय से उत्पादित सभी उत्पादों का समुचित बाजार का भी ज्ञान होना चाहिए तथा बेचने का एक सीधा संपर्क भी होना चाहिए |
  • किसान को इस व्यवसाय के बारे में कम से कम 8 से 6 महीने का अनुभव होना बहुत जरूरी है |
  • शहद का अनुमान मधुमक्खी पालन क्षेत्र के आसपास लगी फसल पर निर्भर करता है इसलिए उचित जगह पर ही बॉक्स स्थापित करें |
  • किसान को लकड़ी के बॉक्स को फूलों और पुष्पन होने वाली जगह पर ही रखे |
  • मधुमक्खी पालन मे काम मे आने वाली मक्खी शांत सभाव की होती है इसलिए इनको रखने के लिए बिना शोर-शराबा वाली जगह चुने |
  • इन मक्खी परिवार मे लगने वाली बीमारियों का विशेष ध्यान रखे |
  • किसान मधुमक्खी पालन को अपनी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भी या इसे व्यवसाय के रूप मे भी शुरू कर सकते है |
  • यदि किसान मधुमक्खी पालन को व्यवसाय के रूप मे शुरू करना चाहता है तो किसान को इसके सभी कच्चे उत्पाद को बेचना होगा, जिससे किसान को दुगना लाभ होता है |
  • इस कृषि व्यवसाय से पूरे साल आमदनी कमाने के लिए बॉक्सो को पूरे साल समय-समय फूलों वाली जगह रखना होता है |

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पर्यावरण में मधुमक्खी का महत्व ?

  • मधुमक्खी फूलों में से शहद निकालने पर फसल में किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है जबकि फसल को कई गुना लाभ होता है 
  • मधुमक्खी फूलों पर बैठकर परागकरण करने का काम करती है जैसे फसल का उत्पादन अधिक होता है |
  • मधुमक्खी पालन के किसान शहद, जेली, मोम, पराग, मौनी-विष जैसे उत्पाद प्राप्त कर सकते है |
  • शुरू से ही मधुमक्खी किसानों के लिए एक बहुत ही अच्छा वरदान साबित है यानि मधुमक्खी पालन जैविक खेती का भरपूर रूप है |

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