लौकी की खेती कैसे करे 2021 | लौकी की खेती | हाइब्रिड लौकी की खेती

लौकी की खेती | लौकी की दवा | हाइब्रिड लौकी का बीज | लौकी बढ़ाने की दवा | लौकी की खेती की जानकारी | लौकी की फसल के रोग | लोकी की खेती | लौकी के पौधे की देखभाल | हाइब्रिड लौकी की खेती | लौकी की नर्सरी कैसे तैयार करें

लोकी भारत की प्रमुख सब्जियों मे से एक है | lauki ki kheti देश मे मौसमी फसल के रूप मे कम समय और अच्छे भाव लेने के उधेशय से भारी मात्रा मे की जाती है | प्रगतिशील किसान बाजार,शहरों के नजदीक / यातायात सुविधा के अनुरूप लौकी की खेती भारी मात्रा मे कर रहे है |

लोकी यह एक [रकर से कन्ददु जाति /वर्ग का का बेल वाला पौधा है | लौकी से देश मे हरी सब्जी, मिठाईया, रायता, कोफ्ते, आदि के साथ कई औषधीय कामों मे इसका प्रयोग किया जाता है |

लौकी-की-खेती
लौकी के पौधे की देखभाल | हाइब्रिड लौकी की खेती | लौकी की खेती की जानकारी

आज के समय देश का किसान लौकी की खेती की जानकारी, हाइब्रिड लौकी का बीज/पौधे की देखभाल कर कम लागत के साथ कम समय मे अच्छा लाभ कमा सकते है | इस लेख के साथ बने रहे लोकी की खेती की सम्पूर्ण जानकारी –

 ड्रैगन फ्रूट के पौधे कहां मिलेंगे | ड्रैगन फ्रूट की खेती | ड्रेगन फ्रूट के फायदे | ड्रैगन फ्रूट की कीमत

लौकी का वानस्पतिक नाम क्या हैLagenaria siceraria है |

लौकी की खेती कब करे ?

लौकी भारत के हर क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसल है, लौकी जायद एवं खरीफ दोनों ही मौसम में उगाई जाती है | जायद के मौसम लौकी की बुवाई जनवरी से फरवरी के अंत तक की जाती है | जबकि खरीफ की फसल के लिए जून – जुलाई मे बुआई कर दी जाती है | बाजार से अच्छे भाव लेने के लिए लौकी की अगेती और पछेती खेती करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है |

लौकी के पौधे की देखभाल | हाइब्रिड लौकी की खेती | लौकी की खेती की जानकारी

लौकी की उन्नत किस्में –

लोकी की बहुत सारी प्रजातियों है जो 100 से लेकर 450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है | लौकी की खेती मे प्रचलित हाइब्रिड लौकी का बीज जो निम्न है –

लौकी की उन्नत किस्में
कोयम्बटूर‐1
अर्का बहार
पूसा समर प्रोलिफिक राउन्ड
पंजाब गोल /कोमल
पूसा संदेश
कल्यानपुर लम्बी हरी
आजाद हरित
आजाद नूतन
पूसा नवीन
पूसा हाईब्रिड‐3
पुसा समर प्रोलेफिक लाग
नरेंद्र रश्मि
लौकी की वैरायटी / लौकी में संकर बीज / लौकी उगाने का तरीका

भिंडी की खेती से कमाई | भिंडी की खेती कैसे करें | भिंडी की अगेती खेती कैसे करें

लौकी की नर्सरी कैसे तैयार करें ?

आज देश का किसान इतना जागरूक हो चुका है की लगभग सभी प्रकार की सब्जियों की खेती करने से पहले उसकी नर्सरी तैयार करता है क्योंकि इसके फायदे काफी ज्यादा है | नर्सरी से तैयार पौधे मे लगभग सभी प्रकार के पौषक तत्व देकर एक अच्छा हाइब्रिड लौकी का बीज का पौधा तैयार कर सकते है |

  • लौकी की नर्सरी की तैयारी मे पहले किसान को अच्छी किस्म का बीज का चुनाव करना है |
  • नर्सरी पौध तैयार करने के लिए छोटे पॉली बेग या प्लांट ट्रे का प्रयोग कर सकते है |
  • मिट्टी की तैयारी के समय अच्छी जैविक खाद तथा जीवाश्म वाली मिट्टी को काम मे लेवे |
  • छोटे पॉली बेग या प्लांट ट्रे मे मिट्टी को भरकर प्रत्येक बेग मे एक-एक बीज हल्का गहरा लगा देना है |
  • बीज लगा देने के बाद छायादारऔर हल्की धूप आने वाले स्थान पर रखकर हल्का पानी जिससे बीज भीग जाए |
  • इस प्रकार से तैयार की गई नर्सरी का पौधा 20-25 दिन मे 4-5 पत्तिया के साथ तैयार हो जाता है |
  • नर्सरी का पौधे के 4 पत्तिया आने पर खेत मे लगा देना चाहिए |

धनिया की खेती 2021-22 जानिए कब और कैसे करें, उन्नत खेती और बीज-भाव

लौकी-की-खेती
लौकी के पौधे की देखभाल | हाइब्रिड लौकी की खेती | लौकी की खेती की जानकारी

लौकी की खेती मे उपयुक्त मिट्टी और जलवायु ?

इसके लिए समशीतोष्ण/ गर्म एव आर्द्र जलवायु उत्तम है | लौकी की खेती करने ले लिए विभिन प्रकार की भूमियों मे इसकी सफल खेती की जा सकती है |

अच्छे उत्पादन लेने हेतु जीवाश्म युक्त उत्तम जल निकास युक्त दोमट, बलुई दोमट और हल्की दोमट भूमि में ही कर सकतें हैं |

खेत की तैयारी

louki की fasl के लिए पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करनी चाहिए, बाद मे 1-2 बार कल्टीवेटर या हैरो कृषि यंत्र चलाए | समतल और तैयार खेत मे फिर किसान अपनी सुविधा के अनुसार लौकी बीज की बुआई कर सकते है -मचान विधि से लौकी की खेती वर्तमान मे ज्यादा प्रचलित और फायदेमंद मानी जाती है |

शरबती गेहूं भाव 2021 | शरबती गेहूं की पहचान | गेहूं की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है ?

बीज बुवाई की मात्रा –

प्रति हैक्टर 4-5 किलोग्राम लौकी बीज उपयुक्त होता है | बीजउपचार मे 2 ग्राम थीरम या बाविस्टीन से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करना है | उपचार करने के लाभ है जिससे कि जमींन या भूमि से पैदा होने वाले रोग न लग सकें |

बुवाई का सही तरीका क्या है –

बुवाई के लिए 3-4 मीटर की दूरी पर एक मीटर चौंड़ी बनी नाली में दोनों मेंड़ो पर अंदर की ओर 55-60 सेंटीमीटर के अन्तराल पर बीजों या पौधों को मेंड की 1/2 ऊंचाई पर बुवाई करनी होती है |

बीज बुवाई करने के बाद बेड पर सड़े गोबर की खाद थोड़ी-थोड़ी ऊपर से ढक देनी चाहिए, जिससे गर्मी पाकर बीज जमाव अच्छा हो सके | यह केवल जायद की फसल के लिए क्योंकि इस समय तापमान कम रहता है |

लौकी के पौधे की देखभाल | हाइब्रिड लौकी की खेती | लौकी की खेती की जानकारी

लोकी फसल मे सिंचाई कब व कैसे करे –

सिंचाई इसमे थोड़ी भिन्न रूप से होती है शुरू में एक दो सिंचाई नालियों में करनी चाहिए, लेकिन पूरे खेत में नमी रहना अति आवश्यक है |

पॉली हाउस सब्सिडी | पॉली हाउस कैसे बनाएं | पाली हाउस लोन स्कीम

सिंचाई प्रबंधन के लिए ग्रीष्म कालीन फसल के लिए 4-5 दिन के अंतराल मे सिंचाई करनी चाहिए | गर्मी के मौसम मे सिंचाई की सुविद कम है तो किसान भाई ड्रिप सिंचाई का सहारा ले सकते है |

वर्षाकालीन / बरसात के मौसम मे सिचाई की कम आवश्यकता पड़ती है इसके लिए किसान भाई फसल मे सिचाई फसल मे मांग के अनुसार कभी भी कर सकते है |

लौकी में कौन सी खाद डालें ?

लौकी की खेती मे 200-250 कुंतल सड़ी गोबर की कम्पोस्ट या कम्पोस्ट खाद प्रति हेक्टर के हिसाब से खेत की आखिरी जुताई के समय देना चाहिए | भूमि कम उपजाऊ या रासायनिक खाद का प्रयोग करना चाहे तो 120 किलोग्राम नत्रजन, 100 किलोग्राम फास्फोरस और 80 किलोग्राम पोटाश तत्व के रूप में दे सकते है |

लहसुन की खेती से कमाई | लहसुन 1 एकड़ में कितना होता है | लहसुन फुलाने की दवा

नत्रजन की 1/2 मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जुताई के समय मिला देना है | नत्रजन की शेष आधी मात्रा खड़ी फसल में दो बार में प्रयोग करते हैं, जिससे की हमें लौकी की फसल पैदावार अच्छी मिल सके |

लौकी-की-खेती
लौकी उगाने का तरीका

खरपतवार प्रबंधन

बात करए निराई-गुड़ाई की तो आम तोर पर खरीफ मौसम या सिंचाई के बात फसल मे काफी खरपतवार उग जाती है | इस अनावशक खरपतवार को खुरपी या रासायनिक दवा[ब्यूटा-क्लोरो ] की मदद से 20 से 25 दिन के अंतराल मे निराई-गुड़ाई करके खेत से निकाल देनी चाहिए | लौकी बढ़ाने के लिए 2 से 3 बार अच्छी निराई-गुड़ाई करके पौधों की जड़ों के निचे मिट्टी को चड़ा देनी चाहिए |

फसल कटाई कब करे –

बाजार मे किस प्रकार की मांग या भाव के अनुसार फसल की तुड़ाई कर सकते है | फसल में फल जब खाने योग्य हो जाएँ तो प्रति सप्ताह या 5-6 दिनों के बाद फलों कि तोड़ाई कर देनी चाहिए |

सही समय पर फल तुड़ाई से फल कड़े न हो सकें और फलों कि गुणवत्ता अच्छी बनी रहे और बाजार में भाव आप को अच्छा मिलता रहे |

गेंदा फूल की खेती कैसे करे | हजारा गेंदा फूल की खेती | गेंदा फूल का रेट 2021

लौकी की फसल मे लगने वाले प्रमुख रोंग कीट ?

इस फसल मे मुख्य रूप से उकठा (म्लानि), चुर्णी फफूंदी, फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) और लाल कीडा (रेड पम्पकिन बीटल) जैसे प्रमुख रोंग का ज्यादातर प्रकोप रहता है | उन्नत खेती और उन्नत उत्पादन के लिए किसान को अपनी फसल मे लगने वाले रोंगों के प्रति सचेत रहना है तथा उनका जल्द निवारण करें |

लौकी के पौधे की देखभाल कैसे करे ?

  • समय-समय पर लोकी की फसल मे आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहे सिंचाई के साथ खाद जरूरी उर्वरक का प्रयोग भी करते रहना चाहिए |
  • फसल मे 20 से 25 दिन के अंतरालों मे निराई-गुड़ाई करते रहे |
  • समय-समय पर खेत मे पूरी फसल की देखरेख करते रहे किसी भी प्रकार के रोंग कीटों का प्रभाव है तो जल्द से जल्द उसका उपचार करें |
  • लौकी की बेल की जड़ों मे ज्यादा समय तक पानी का भराव न होने दे यानि ज्यादा सिंचाई न करे और पानी भराव वाली भूमि मे खेती ना करें |
  • लौकी की व्यवसायिक खेती करते समय फसल मे किसी भी प्रकार की रासायनिक दवा का प्रयोग करने से पहले सही ज्ञान या कृषि विशेषज्ञ से पूछ कर ही प्रयोग करें |

सब्जी की खेती से कमाई | सब्जियों की अगेती खेती | सब्जी की खेती

लोकी की पैदावार –

किसान भाइयों बात करे लोकी की खेती मे प्रति हेक्टेयर उत्पादन की तो लोकी की खेती मे 200 से 450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक लोकी की पैदावार प्राप्त कर सकते है | लेकिन किसान भाई ध्यान रखे ये पैदावार निर्भर करती है -हाइब्रिड लौकी का बीज, लौकी की फसल के रोग, लौकी के पौधे की देखभाल, मौषम, लौकी की खेती मे बुआई की विधि आदि पर |

लौकी की नर्सरी कैसे तैयार करें ?

लौकी की नर्सरी की तैयारी मे पहले किसान को अच्छी किस्म का बीज का चुनाव करना है |
नर्सरी पौध तैयार करने के लिए छोटे पॉली बेग या प्लांट ट्रे का प्रयोग कर सकते है |
मिट्टी की तैयारी के समय अच्छी जैविक खाद तथा जीवाश्म वाली मिट्टी को काम मे लेवे |
छोटे पॉली बेग या प्लांट ट्रे मे मिट्टी को भरकर प्रत्येक बेग मे एक-एक बीज हल्का गहरा लगा देना है |
बीज लगा देने के बाद छायादारऔर हल्की धूप आने वाले स्थान पर रखकर हल्का पानी जिससे बीज भीग जाए |
इस प्रकार से तैयार की गई नर्सरी का पौधा 20-25 दिन मे 4-5 पत्तिया के साथ तैयार हो जाता है |
नर्सरी का पौधे के 4 पत्तिया आने पर खेत मे लगा देना चाहिए |

लौकी की उन्नत किस्में ?

कोयम्बटूर‐1
अर्का बहार
पूसा समर प्रोलिफिक राउन्ड
पंजाब गोल /कोमल
पूसा संदेश
कल्यानपुर लम्बी हरी
आजाद हरित आदि |

लौकी में कौन सी खाद डालें?

लौकी की खेती मे 200-250 कुंतल सड़ी गोबर की कम्पोस्ट या कम्पोस्ट खाद प्रति हेक्टर के हिसाब से खेत की आखिरी जुताई के समय देना चाहिए | भूमि कम उपजाऊ या रासायनिक खाद का प्रयोग करना चाहे तो 120 किलोग्राम नत्रजन, 100 किलोग्राम फास्फोरस और 80 किलोग्राम पोटाश तत्व के रूप में दे सकते है |

लौकी की बेल की देखभाल कैसे करें ?

समय-समय पर लोकी की फसल मे आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहे सिंचाई के साथ खाद जरूरी उर्वरक का प्रयोग भी करते रहना चाहिए |
फसल मे 20 से 25 दिन के अंतरालों मे निराई-गुड़ाई करते रहे |
समय-समय पर खेत मे पूरी फसल की देखरेख करते रहे किसी भी प्रकार के रोंग कीटों का प्रभाव है तो जल्द से जल्द उसका उपचार करें |

Leave a Comment