[ गन्ने की खेती कैसे होती है 2022 ] गन्ने की वैज्ञानिक खेती | गन्ने की खेती से कमाई

Last Updated on July 31, 2022 by [email protected]

हमारे देश में गन्ना की फसल को नकदी फसल के रूप में माना जाता है | गन्ना देश के चीनी आधारित उद्धोगो का मुख्य आधार है | गन्ने से शक्कर / शुगर, गुड, शराब, कई रसायन- केमिकल, एथेनॉल (पेट्रोल मे मिलाया जाता है ) और स्प्रिट जैसे कई कई उत्पाद बनाये जाते है | विश्व मे सबसे ज्यादा गन्ना भारत मे उगाया जाता है जो लगभग पूरे उत्पादन का 35% है | जिसकी खेती हर वर्ष लगभग 30 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती है |

गन्ने-की-खेती

आज के समय जागरूक किसान गन्ने की खेती कर अच्छा लाभ कमा रहे है तथा बाजार मे भी गन्ने की मांग और भाव अच्छे बने हुए रहते है | तो किसान भाइयों आइए जानते है गन्ने की खेती, गन्ने की वैज्ञानिक खेती, गन्ने की दवा, गन्ने में फुटाव की दवा, गन्ने की खेती से कमाई आदि के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी –

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गन्ने की उन्नत किस्में ?

गन्ने की उन्नतशील प्रजातियाँ मे देश मे बहुत सारी किस्मे है जो हर क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार विकशीत होती है | देश मे ज्यादा उत्पादन वाली गन्ने की किस्मेSaccharum barberi, Saccharum officinarum, Saccharum edule, Saccharum spontaneum एव Saccharum ravennae आदि गन्ने की नई किस्मे है इनके आलवा –

शीघ्र पकने वाली गन्ने की किस्मों के नाममध्य एवं देर से पकने गन्ने की प्रजातियां
कोयम्बटूर शाहजहांपुर 8436, 88230, कोयम्बटूर सेलेक्शन-00235,
95255, 96268, 98231, 95436 तथा 01235 आदि हैं |
कोयम्बटूर शाहजहांपुर 8432, 94257, 84212, 97264, 95422, 96275, कोयम्बटूर पन्त 84212, KS- 97261, 96269, 99259
एवं यू. पी. 0097 / ह्रदय, यू. पी.-22 तथा कोयम्बटूर सेलेक्शन 95422, व 96436 आदि हैं |
गन्ने की खेती से कमाई | गन्ने की वैज्ञानिक खेती

गन्ने की खेती के लिए जलवायु एव मिट्टी ?

बीज बुवाई के समय 30-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना उत्तम माना जाता है, साथ ही वातावरण शुष्क होने पर बुवाई करनी चाहिए | गन्ने की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमटऔर काली दोमट मृदा सर्वोतम मानी जाती है |

गन्ने के खेत में जल निकास की समुचित व्यवस्था हो |

गन्ना खेतों की तैयारी ?

खेत को 2-3 जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करके अच्छी तरह भुरभुरा बना लेना है | आखिरी जुताई के समय खेत मे 200-250 कुंतल सड़ी गोबर की खाद मिलकर तैयार करना चाहिए |

गन्ने-की-खेती

यदि खेत कम उपजाऊ है तो किसान रसायनिक खाद का भी प्रयोग कर सकता है, इसके लिए पहले मिट्टी की जाँच करवानी होगी | 150 kg नाइट्रोजन, 80 kg फास्फोरस, 40 kg पोटाश तत्व के रूप में / हेक्टेयर प्रयोग करतें हैं | इसके साथ ही 25 kg जिंक सल्फेट / हेक्टेयर प्रयोग कर सकते है |

जिंक सल्फेट कि पूरी मात्रा खेत तैयारी के समय या पहली सिंचाई के बाद पौधों के पास देकर गुडाई करनी चाहिए | नाइट्रोजन को अप्रैल-मई में दो बार में समान बाट कर प्रयोग कर सकते है |

गन्ना बीज बुवाई ?

रोग रहित और कीट मुक्त खेती के लिए स्वस्थ बीज का चुनाव करें | गन्ने के 1/3 उपरी भाग का जमाव अच्छा माना जाता है | गन्ना बीज की मोटाई के अनुसार बीज की मात्रा कम ज्यादा लग सकती है लेकिन लगभग 50-60 कुंतल 37500 बीज, तीन आंख वाले टुकड़े या पैंडे / हेक्टेयर लगते हैं | बुवाई मे देरी करने पर डेढ़ गुना बीज की आवश्यकता पड़ती है | दो आँख वाले पैंडे 56000 / हेक्टेयर लगते हैं |

गन्ना बोते समय क्या क्या डालना चाहिए?

पारायुक्त रसायन – एरीटॉन 6% या कॉपर सल्फेट 3% को क्रमशः 250 ग्राम या 560 ग्राम और बाविस्टीन कि 112 ग्राम मात्र प्रति हेक्टेयर कि दर से 115 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ने के टुकड़ों या पैंडे को उपचारित करना है |

गन्ना बुवाई की विधि ?

आज के समय हर किसान अलग-अलग तौर तरीकों से गन्ना बोने की विधि का प्रयोग कर रहा है | ज्यादा प्रचलित गन्ने की बुवाई हल के पीछे लाइनों में करनी चाहिए |

लाइन से लाइन की दूरी बुवाई के मौसम एवं समय के आधार पर अलग-अलग रखी जाती है | शीत एवं बसंत की बुवाई में 90 cm तथा देर से बुवाई करने पर 60 cm लाइन से लाइन की दूरी रखी जाती है | तथा पैंडे से पैंडो की दूरी 20 सेंटी-मीटर दो आंख वाले गन्ने की रखना सही है |

गन्ना की सिंचाई ?

सिंचाई मे गन्ना बुवाई एवं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग समय से की जाती है | वैसे गन्ने की फसल मे कम से कम 4 सिंचाई और अधिकतम 7-8 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है |

गन्ने की फसल में खरपतवार नियंत्रण ?

गन्ना के पौधों की जड़ों को नमी एव हवा उपलब्ध करने के लिए खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है | इसके लिए ग्रीष्म ऋतु में प्रत्येक सिंचाई के बाद फावड़ा, कस्सी या कल्टीवेटर से अच्छी गुड़ाई जरूर करें |

इसके साथ खरपतवार नियंत्रण हेतु बुवाई के 1-2 दिन बाद पैंडेमेथीलीन 30 ec की 3.3 kg मात्रा /हेक्टेयर की दर से 800-900 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए |

गन्ने की फसल में मिट्टी चढ़ाना ?

गन्ने के पौधों या बेड के घेरों की जड़ पर जून माह के अंत में हल्की मिटटी चढ़ानी शुरू करनी है | इसके बाद जब फसल थोड़ी और बढवार कर चुके तब जुलाई के अंत में दुबारा पर्याप्त मिटटी और चढ़ा देना है, जिससे की वर्षा होने पर फसल गिर ना सके |

गन्ने-की-खेती

गन्ना रोग और नियंत्रण कैसे करें ?

गन्ने की खेती वानस्पतिक सवर्धन या बीज उपचारित विधि द्वारा की की जानी चाहिए, जिसमे अधिकांश रोग गन्ने के बीज द्वारा फैलतें हैं उनका नियंत्रण हो सके |

गन्ने की फसल मे लगने वाले प्रमुख रोग जो की निम्न है, काना रोग, कन्डुआ रोग, उकठा रोग, अगोले का सडन रोग, पर्णदाह रोग, पत्ती की लाल धरी, वर्णन रोग आदि हैं, इनकी रोकथाम के लिए निम्न उपाए करने चाहिए-

  1. गन्ना किस्म का चुनाव के समय रोग रोधी प्रजातियों का चयन करें | स्वस्थ एवं रोग रहित पैड़ी के टुकड़ों से बुवाई करे |
  2. रोगी गन्ने के पौधों को पूरा-पूरा उखाड़ कर अलग कर देना चाहिए जिससे संक्रमण दुबारा न हो सके |
  3. फसल चक्र अपनाऐ तथा रोग ग्रसित खेत को दुबारा कम से कम 1 साल तक गन्ना नहीं बोना चाहिए |
  4. खेत से जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे की वर्षा का पानी खेत में न रुक सके क्योंकि स्थिर जल से रोग फैलतें हैं |
  5. रोग से प्रभावित खेत में कटाई के पश्चात पत्तियों एवं ठूंठों को जला देना चाहिए |
  6. गन्ने की कटाई एवं खेत सफाई के बाद गहरी जुताई करनी चाहिए |
  7. गन्ने के घरेलू बीज को गर्म पानी में शोधित कर, गन्ने के बीज को रसायनों से उपचारित करके बोना चाहिए |

गन्ना फसल की कटाई ?

फसल की आयु ,पूर्ण पकाई, प्रजाति तथा बुवाई के समय के आधार पर नवम्बर से अप्रैल तक कटाई होती है | कटाई के 15 लगभग दिन पहले सिंचाई बंद कर देना चाहिए | कटाई के पश्चात गन्ना को किस प्रकार या किस उधेशय से खेती की है उस हिसाब से जल्दी काम मे ले सकते है |

ज्यादातर किसान चीनी मिलों को बेचते है इसके लिए कटाई के तुरंत बाद शुगर फेक्ट्री में भेज देना चाहिए | ज्यादा समय रखने पर गन्ने का वजन घटने लगता है तथा गन्ने मे शुगर या सकर प्रतिशत कम होता जाता है |

गन्ने की पैदावार प्रति हेक्टेयर ?

गन्ने की पैदावार किस्मो / प्रजातियों के आधार पर अलग-अलग तथा खेती की देख-रेख , कीट रोंग, मोसम आदि पर निभर होती है |

  • शीघ्र पकने वाली किस्मे 80-90 टन /हेक्टेयर
  • मध्य एवं देर से पकने वालीं प्रजातियाँ में 90-100 टन /हेक्टेयर
  • जल प्लावित संचाई क्षेत्रों में पकने वाली किस्मे 80-90 टन /हेक्टेयर

गन्ने की खेती से कमाई ?

sugarcane farming मे लगभग 30 हजार रुपए प्रति एकड़ का खर्चा आता है | यदि लागत को घटा दे तो प्रति एकड़ किसानों को 70 हजार से 1 लाख रुपए का मुनाफा हर साल कमा सकते है | धान और गेहू की तुलना में गन्ना की खेती में दो-तीन गुणा अधिक कमाई हो सकती है |

गन्ने की खेती सबसे ज्यादा कहां होती है ?

चीनी उद्योग देश का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है, जो सिर्फ गन्ना उत्पादन पर निर्भर रहता है | देश मे उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादक राज्यों में सबसे आगे है | पूरे भारत के कुल गन्ने रकबे का 53 % से भी अधिक रकबा अकेले उत्तर प्रदेश में होता है | देश मे गन्ने की खेती सबसे ज्यादा प्रमुख उतरप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल, आंध्र प्रदेश व गुजराज, कर्नाटक राज्यों मे होती है |

गन्ने में फुटाव की दवा ?

किसान गन्ने की वैज्ञानिक खेती मे गन्ने में फुटाव की दवा का प्रयोग करना चाहे तो इसके लिए –

  1. इफ्को की सागारिका 20 KG प्रति एकड़ और डीएपी 50 KG प्रति एकड़ के साथ 60 KG प्रति एकड़ यूरिया डाकर सिंचाई कर सकते है, इससे पेडी अच्छी और फुटाव आएगा |
  2. गन्ने के अच्छे फुटाव के लिए समय-समय गुड़ाई कर कूंड़ बनाकर यूरिया खाद की दूसरी बार प्रयोग करें |
  3. गन्ने के कल्लों मे कटाई-छटाई यदि हो गई हो तो सिंचाई करें और उर्वरक की शेष मात्रा कूंड़ बनाकर डाल दें |

गन्ने की बुवाई में कौन सी खाद डालें?

यदि खेत कम उपजाऊ है तो किसान रसायनिक खाद का भी प्रयोग कर सकता है, इसके लिए पहले मिट्टी की जाँच करवानी होगी | 150 kg नाइट्रोजन, 80 kg फास्फोरस, 40 kg पोटाश तत्व के रूप में / हेक्टेयर प्रयोग करतें हैं | इसके साथ ही 25 kg जिंक सल्फेट / हेक्टेयर प्रयोग कर सकते है |

गन्ना की खेती कब की जाती है?

शरदकालीन गन्ने की बुवाई देश मे 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के मध्य का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है |

गन्ने की ग्रोथ कैसे बढ़ाए?

गन्ने की वैज्ञानिक खेती मे गन्ने में फुटाव की दवा का प्रयोग करना जिससे ग्रोथ अच्छा हो –
गन्ने के अच्छे फुटाव के लिए समय-समय गुड़ाई कर कूंड़ बनाकर यूरिया खाद की दूसरी बार प्रयोग करें |
गन्ने के कल्लों मे कटाई-छटाई यदि हो गई हो तो सिंचाई करें और उर्वरक की शेष मात्रा कूंड़ बनाकर डाल दें |

गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है?

देश मे उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादक राज्यों में सबसे आगे है | पूरे भारत के कुल गन्ने रकबे का 53 % से भी अधिक रकबा अकेले उत्तर प्रदेश में होता है |

गन्ने में कौन सा रोग होता है?

गन्ने की फसल मे लगने वाले प्रमुख रोग जो की निम्न है काना रोग, कन्डुआ रोग, पत्ती की लाल धरी, उकठा रोग, अगोले का सडन रोग, पर्णदाह रोग, वर्णन रोग आदि हैं |

गन्ने की फसल कितने दिन में तैयार होती है?

यह फसल मुख्यतः प्रमुख टॉप मुनाफेदार और नगदी फसलों वाली फसल है, जिसकी पकने की अवधि की बात करें तो 12 से 14 महीने का समय लगता है |

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