अरण्डी की खेती जानिए अरण्डी की उन्नत किस्में | अरण्डी का भाव 2021

अरण्डी की खेती, तिलहनी फसलें | भारत मे अरंडी की खेती और उत्पादन | अरण्डी की खेती कब और कैसे करे | अरण्डी की उन्नत किस्में | अरण्डी का भाव | अरण्डी का पौधा | अरण्डी के बीज का उपयोग

तिलहनी फसलों मे जानी-मानी अण्डी नगदी फसलों में आती है इसका तेल बहुत ही महत्वपूर्ण होता है | अरण्डी का तेल से बहुत से सामान/उत्पाद बनाये जाते है जैसे कि इसका तेल डाई, डिटर्जेंट, दवाये, प्लास्टिक, छपाई की स्याही लिनोलियम फ्लूड, पेंटस लेदर, मरहम, पालिश, फर्श का पेंट लुब्रिकेंट आदि चीजे बनाने के काम आता है। अरंडी की पत्तियो को रेशम का कीड़ा भोजन के रूप में बड़े चाव से खाते है। 

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अरण्डी की खेती

देश के किसान अरंडी की खेती कर इसका तेल बेच कर अच्छी-खासी आय प्राप्त कर सकते हैं, आइए जानते हैं अरंडी की उन्नत खेती तथा इसके बाजार भाव, अरंडी की खेती की संपूर्ण जानकारी  –

देश के अधिकतर हिस्सों में अरंडी की खेती मिश्रित रूप से की जाती है | जिसमें खेत की मेड़ों पर कुछ पौधों को लगा देते हैं खेत में अरंडी के पेड़ से फसल को सुरक्षा मिलती है तथा रोग कीट भी नहीं लगते हैं |

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अरण्डी की खेती कब और कैसे करे ?

इसकी खेती नगदी फसलों मे मनी जाती है, खेती चाहे कैसी भी आज के समय जानकारी और बाजार मे मांग के अनुसार ही करनी चाहिए | अरण्डी की खेती कर किसान अच्छा उत्पादन और लाभ कम सकता है तो आइए जानते है पूरी जानकारी –

आवश्यक जलवायु और भूमि ?

अण्डी की खेती गर्म व् तर जलवायु में की जाती है इसके लिए शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है | arandi ki kheti 50 से 75 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में भी की जा सकती है। अण्डी प्रत्येक प्रकार की भूमि में सफलतापूर्वक की जा सकती है लेकिन सामान रूप से अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट तथा हल्की मटियार भूमि में की जा सकती है। arandi ki kheti के लिए मिट्टी का ph मान 5 से 6 माना जाता है |

अरण्डी की खेती

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अरण्डी की उन्नत किस्में ?

अण्डी की दो प्रकार की प्रजातियां पाई जाती है

प्रथम संकुल या देशी प्रजातियां जैसे की टाइप 3, टाइप 4, अरुण, ज्योति, क्रांति, तराई4, कालपी6, ज्वाला 48-1, सी.ओ1 एवं किरन है। द

सरे प्रकार की संकर प्रजातियां है जैसे की जी.सी.एच.2, जी.सी.एच.4, जी.सी.एच.5, डी.सी.एच.177, डी.सी.एच.32 एवं डी.एम्.बी.5, डी.एम्.बी.6 है।

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अरण्डी की खेती

खेत की तैयारी कैसे करे ?

शुद्ध खेती करने के लिए पहली जुटाई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करके खेत में पाटा लगाकर समतल कर लेना चाहिए मेड़ों के किनारे थाले बनाकर थालों को भुरभुरा करके बुवाई करते है।

यदि किसान मेड पर मिश्रित रूप से arandi ki kheti करता है तो गड़े विधि से कर सकता है |

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अण्डी की बुवाई का सही समय और उपयुक्त विधि ?

बरसात के मौषम मे वर्षा होने पर 15 जुलाई से 15 अगस्त तक बुवाई की जा सकती है इसकी बुवाई लाइनो में 90 सेंटीमीटर से एक मीटर की दूरी पर हल के पीछे पौधे से पौधे की दूरी 60 सेंटीमीटर रखी जाती है | मेंड़ों के किनारे 60 सेंटीमीटर की दूरी पर थाले बनाकर बुवाई थालों में की जाती है।

अण्डी की खेती में बीजों की मात्रा ?

अण्डी की बुवाई में संकुल या देशी प्रजातियों का बीज 15 किलोग्राम तथा संकर प्रजातियों का बीज 5 से 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

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अरण्डी की खेती में खाद -उर्वरक ?

अण्डी की अच्छी पैदावार लेने हेतु 50 किलोग्राम नत्रजन, 25 किलोग्राम फास्फोरस तत्व के रूप में तथा राकर व् भूड़ भूमि में 15 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यकता पड़ती है |

नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस व् पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय तथा नत्रजन की शेष आधी मात्रा खड़ी फसल में निराई-गुड़ाई की समय देना चाहिए।

अण्डी की फसल में सिंचाई ?

वर्षा ऋतु की फसल होने के फलस्वरूप सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है पानी न बरसने पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए। वैसे गर्मी के समय इसकी फसल मे सिंचाई हर माह करते रहना चाहिए |

अण्डी की फसल में कौन-कौन से रोग लगते है ?

इसमे पत्तियो का धब्बेदार रोग लगता है इसकी रोकथाम के लिए 2 किलोग्राम जिंक मैग्नीज कार्बोनेट अथवा 80 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण को 2 किलोग्राम अथवा जीरम 27 प्रतिशत को 3 लीटर का मिश्रण बनाकर छिड़काव प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए |

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Arandi ki kheti me विल्ट बीमारी भी लगती है रोकथाम हेतु फसल में पानी नहीं भरना चाहिए | तथा रोगरोधी प्रजातियों का प्रयोग करना चाहिए।

अण्डी में कैस्टर सेमीलूपर लगता है इसके साथ ही टोबैको कैटरपिलर एवं लीफ हापर भी लगता है। रोकथाम के लिए क्यूनालफास 1.5 लीटर या मिथाइलपैराथियान 2 प्रतिशत को 25 किलोग्राम या डी.डी.वी.पी. 76 प्रतिशत को 50 मिलीलीटर लेकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

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अरण्डी की खेती

अण्डी की फसल से प्रति हेक्टेयर पैदावार ?

सभी तकनीको को अपनाते हुए उपज प्रजातियों के आधार पर प्राप्त होती है जैसे कि संकुल या देशी प्रजातियों में 12 से 14 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है | तथा संकर प्रजातियों में 25 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।

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अरण्डी का भाव ?

बाजार भाव की बात करे तो यह भारतीय बाजारो मे बिक रही है | इसी और अरण्डी का मंडी भाव मार्च मे 4000 रुपये प्रति क्विंटल से 6500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है |

अरण्डी को कहाँ बेचे मंडी कहा है ?

किसान अपनी अरंडी की फसल को अपने नजदीकी किसी भी कृषि उपज मंडी मे बेच सकता है |

यदि किसान इन कम उत्पादित और महगी औषधीय फसलों को ज्यादा दामों मे बेचने के लिए अपने राज्य की शीर्ष जानी-मानी मंडियों मे भी जा सकते है |

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अरण्डी की खेती

भारत मे अरंडी की खेती और उत्पादन ?

भारत दुनिया का सबसे अधिक अण्डी पैदा करने वाला देश है। भारत में 7.3 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती की जाती है इसके उत्पादन 8 लाख टन मे किया जाता है | देश मे अरंडी 1094 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उत्पादकता है |

भारत में इसके उत्पादन गुजरात, आँध्रप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश में होता है पूरे भारत का 80 % उत्पादन तथा 50 % क्षेत्रफल केवल गुजरात में है |

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उत्तर प्रदेश में अरण्डी की खेती तराई क्षेत्र के पीलीभीत, खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, संतकबीरनगर, गोंडा, गोरखपुर तथा बुंदेलखंड क्षेत्र एवं कानपुर, इलाहाबाद व् आगरा जनपदो में शुद्ध तथा मिश्रित रूप से की जाती है इसकी खेती मक्का तथा ज्वार के साथ मेंड़ो पर लाइन में की जाती है यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है।

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