जैविक उर्वरक के नाम 2024 – जानिए जैविक उर्वरक क्या है, परिभाषा, जैव उर्वरक कितने प्रकार के होते हैं | Bio Fertilizer

Last Updated on May 19, 2024 by krishisahara

जैविक खेती आधारित, कृषि को बढ़ावा देने के लिए जैव उर्वरक का महत्व बढ़ता जा रहा है | बाजार में आज के समय कई प्रकार के जैविक उत्पादों को लाकर किसानों को बेचा जा रहा है | किसानों को जैविक उर्वरक के नाम और महत्व बताया जा रहा है, क्योंकि किसान रासायनिक खादों का लगातार उपयोग कर रहे, जिससे हमारी कृषि भूमि व वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है |

यदि किसान भाई जैविक उर्वरक का उपयोग करना शुरू कर दे, तो इससे खेती एव फसलों में प्रदूषण भी काफी हद तक कम हो सकता है| आपकी जानकारी के लिए बता दे की जैविक उर्वरक एक ऐसा उर्वरक है, जो जैविक स्त्रोत से प्राप्त होता है | जैविक खाद, मुर्गी पालन, पशु खाद तथा घरेलू सीवेज शामिल है, यह उर्वरक सभी फसलों के लिए लाभदायक साबित होगा |

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यह लेख सभी जागरूक किसानों के लिए बहुत ही खास होने वाला है, क्योंकि इस लेख में हम जैविक उर्वरक से संबंधित चर्चा करने वाले है – जैसे की जैविक उर्वरक क्या है? टॉप जैविक उर्वरक के नाम? जैविक उर्वरक का उपयोग कैसें करना चाहिए? राइजोबियम जैव उर्वरक क्या है? जैविक उर्वरक के प्रमुख लाभ और हानियाँ –

जैविक उर्वरक क्या है/किसे कहते हैं ?

जैविक उर्वरक एक प्रकार के जीव(कवक तथा सायनोबेक्टरीय) होते है, जो मृदा की पोषण गुणवता को बढ़ाता है| यह जीवाणु कवक तथा सायनोबेक्टरीय के मुख्य स्त्रोत होते है| जैविक उर्वरक एक ऐसी सामग्री है, जिसे पौधों के समुचित विकास के लिए तथा पोषण तत्व प्रदान करने के लिए मिट्टी या पौधों पर उपयोग किया जा सकता है |

टॉप जैविक उर्वरक के नाम –

एजोटोबैक्टर जैव उर्वरक – यह उर्वरक खेतों की मिट्टी /मृदा में पाया जाता है | एक मृतजीवी जीवाणु है, जो की अदलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिकरण में सहायक होता है |
राइजोबियम जैव उर्वरक – रिजोबियम जैव उर्वरक का उपयोग दलहनी फसलों में किया जाता है और मिट्टी तथा बीज के उपचार के लिए इसका उपयोग भी किया जाता है |
नील हरित शैवाल जैव उर्वरक – मिट्टी और फसलों को नत्रजन दिलाने का प्रमुख साधन है |
माइक्रोफॉस जैव उर्वरक – इस उर्वरक के उपयोग से फास्फोरस तत्व उपलब्धता में वृद्धि हो जाती है |

जैव उर्वरक कितने प्रकार के होते हैं?

सुक्ष्मजीव प्रकार के आधार पर जैव उर्वरक को निम्न प्रकार से भी वर्गीकृत किया जा सकता है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है –

क्र. म.जैव उर्वरक प्रकारउदाहरण
1 .फफूंद जैव उर्वरकमाइकोराइजा
2 .जीवाणु जैव उर्वरकरिजोबियम, एजोटोबेक्टर,
एजोसपिरिलीयम,
फैस्फोबैक्टीरिया
3 .अल्गल जैव उर्वरकब्लू ग्रेन शेवाल और एजोला
4 .एक्टिनोमैसेसफ्रेकिया

जैविक उर्वरक की परिभाषा?

फसलों के लिए उपयोगी जीवाणु को मिलाकर पैकेट बनाए जाते है, जिन्हे जैव उर्वरक कहते है| इस उर्वरक को आपको उचित तापमान पर रखने पर लगभग एक सप्ताह में जीवाणु की वृद्धि हो जाती है| जैव उर्वरक को जैव कल्चर या जैव टिके भी कहा जाता है |

जैविक उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव क्या है ?

जैव उर्वरक वह प्रदार्थ होते है, जिसमे सूक्ष्मजीव होते है | यह सूक्ष्मजीव पौधे को आवश्यक पोषण तत्वों की आपूर्ति बढ़ाकर पौधे और पेड़ो के विकास को बढ़ावा देने में मदद करते है| जैव उर्वरक मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाता है और मिट्टी में आवश्यक पोषण तत्व जैसे नाइट्रोजन, प्रोटीन तथा विटामिन मिलाते है| जैव उर्वरको का प्राकृतिक रूप है, इसलिए व्यापक रूप से कृषि में पहले से मौजूद होते है |

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जैविक उर्वरक का उपयोग कैसें करना चाहिए ?

  • मृदा उपचार के लिए जैविक उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है, इसके लिए आपको 4 किलो प्रत्येक अनुशंसित जैव उर्वरक को 200 किलो खाद में मिलाकर रात भर रखा जाता है |
  • इस मिश्रित को बुआई या रोपाई के समय मिट्टी में मिला दिया जाता है |
  • जैविक उर्वरक का उपयोग आप सिडलिंग या जड़ उपचार के लिए भी उपयोग कर सकते है, इसके लिए आपको फसल के लिए खेत में क्यारी बनाकर उसमे पानी भर देना है |
  • अनुशंसित जैव उर्वरकों को इस पानी में मिलाया जाता है |
  • पौधे की जड़ों को 8 से 10 घंटे के लिए पानी में डुबोया जाता है |
  • जैविक उर्वरक का का उपयोग आप सीधे खेत में भी कर सकते है |
  • जैविक उर्वरक का उपयोग आप बीज उपचार के लिए भी कर सकते है |
जैविक-उर्वरक-के-नाम

जैविक उर्वरक के प्रमुख लाभ और हानियाँ ?

  • जैविक उर्वरक के उपयोग से हर सीजन में अच्छी उपज मिलेगी |
  • इसके उपयोग से बुवाई के समय बीजों का अंकुरण शीघ्र होता है |
  • जमीन की उर्वरा शक्ति को लम्बे समय तक बढ़ाते है |
  • इसके उपयोग से उपज में लगभग 10 से 15 % की वृद्धि होती है |
  • जैविक उर्वरक के उपयोग से कोई हानि नही है, परंतु जैविक उर्वरक थोड़ा महंगा आता है |

जैव उर्वरक के उपयोग कहाँ कहाँ किया जा सकता है ?

जैविक उर्वरक का उपयोग मृदा, बीज और सिडलिंग या जड़ उपचार के लिए जब उर्वरक का उपयोग किया जाता है| कई किसान भाईयो जैविक उर्वरक का उपयोग सीधे खेत मे ही करते है, यह तरीका भी सही है |

जैविक उर्वरक

माइक्रोफॉस जैव उर्वरक क्या है – Microfoss bio fertilizer ?

इस जैव उर्वरक में ऐसी जीवाणु का समावेश किया जाता है, जो रॉक फैसफोट तथा मृदा में मौजूद अघुनशील फास्फोरस को घुननशील बना देता है| इससे पौधे में फास्फोरस तत्व की उपलब्धता में वृद्धि हो जाती है| इस प्रकार पौधे को दिए जाने वाले फास्फेट उर्वरक की उपयोग क्षमता 15 से 20 % होती है |

एजोटोबैक्टर जैव उर्वरक – Azotobacter Bio Fertilizer ?

यह मृदा में पाया जाने वाला एक मृतजीवी जीवाणु है, जो की अदलहन फसलों में नाइट्रोजन स्थिकरण में सहयक होता है| इस जैव उर्वरक का उपयोग मुख्य रूप से धान तथा गेहूं की फसलों में इसका उपयोग किया जाता है| इसके उपयोग से मिट्टी में लगभग 40 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर स्थिर हो जाती है |

राइजोबियम जैव उर्वरक – Rhizobium bio fertilizer ?

विभिन्न फसलों में कई प्रकार के राइजोबियम जीवाणु पाए जाते है, उसके द्वारा नाइट्रोजन बंधन क्षमता भी भिन्न होती है| नाइट्रोजन का अधिकांश भाग वायुमंडल में विघमान है, नाइट्रोजन को वायुमंडल से भूमि में पहुंचने का एक माध्यम है |

नील हरित शैवाल जैव उर्वरक – Indigo Green Algae Bio Fertilizer ?

यह उर्वरक नाइट्रोजन के स्थितिकरण के सहायक होता है, नील हरित शैवाल जैव उर्वरक को सायनोबेक्ट्रिय भी कहा जाता है| मिटी में पाई जाने वाली नील हरित शैवाल प्रजातियां बड़े आकार की तथा सरचना में जटिल होती है| इन प्रजातियों में हाइट्रोसिस्ट रहित प्रजातियां शामिल है, इस उर्वरक का उपयोग धान की फसल के लिए अधिक उपयोग किया जाता है |

सबसे अच्छा जैविक उर्वरक कौन सा है?

वेस्ट डी कंपोस्ट तथा रिजोबियम, एजोटोबेक्टर आदि अच्छे जैविक उर्वरक की श्रेणी में आते है | – जैव उर्वरक PDF

5 जैविक उर्वरक उदाहरण क्या हैं?

मुख्यतः माइकोराइजा, रिजोबियम, एजोटोबेक्टर, एजोसपिरिलीयम और फैस्फोबैक्टीरिया आदि जैविक उर्वरक के उदाहरण है |

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