[kapas ki kheti ] कपास की खेती कैसे करे 2021 भारत में कपास की खेती कहां होती है

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कपास एक महत्वपूर्ण नकदी फसल जानी जाती है जिसे किसान का सफेद सोना /स्वेत स्वर्ण भी कहते है | देश में व्यापक स्तर पर कपास उत्पादन की आवश्यकता है | क्योंकि देश मे वस्त्र उद्धोग, पशुआहार, खली/ खल व् तेल, औषधीय क्षेत्र मे कपास का व्यापक उपयोग है | वर्तमान मे देश मे 9.4 मिलियन हेक्टेयर की भूमि पर कपास की खेती की जा रही है |

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कपास की उन्नत खेती | kapas ki kheti | कपास की दवा | भारत में कपास की खेती कहां होती है

आधुनिक तकनीकी अपनाकर अधिक से अधिक उपज और किसान आय प्राप्त की जा सकती है | आज के समय देश का प्रगतिशील किसान कपास की खेती से अच्छी कमाई ले रहा है | तो आइए जानते है कपास की उन्नत खेती के बारे मे, कपास की खेती कैसे करें, कपास की खेती की जानकारी –

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कपास की किस्में

कपास की खेती के बारे में उन उन्नतशील प्रजातियों के बारे में जिसका इस्तेमाल खेती कर करके अच्छा लाभ कमा सके | कपास की खेती के लिए दो प्रकार कपास का बीज / किस्म / प्रजातीया पाई जाती है जो निम्न है –

कपास की देशी किस्मेंकपास की अमेरिकन किस्में
लोहित,
आर. जी. 8
सी. ए. डी. 4
एच. एस. 6
विकाश
एच 777
एफ 846
आर. एस. 810
आर. एस. 2013
कपास की किस्में/ kapas ki kheti in india

आवश्यक मिट्टी और जलवायु ?

कपास की उन्नत खेती हेतु न्यूनतम 14-16 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान, फसल बढ़वार के समय 21 से 28 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान उत्तम माना जाता है |

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कपास के गूलरो के पकते समय चमकीली धूप के साथ पाला रहित मौषम की आवश्यकता होती है | kapas ki kheti लगभग सभी मिट्टी मे सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है | लेकिन बलुई, क्षारीय एवम जल भराव वाली भूमि में कपास की खेती के लिए सही नहीं है काली दोमट, दोमट-मटियार भूमि सर्वोत्तम होती है |

कपास की खेती कैसे करें | कपास की खेती की जानकारी

कपास की बुवाई का समय ?

कपास की बुवाई का सही समय वैराइटियों के आधार पर अलग-अलग होता है | देशी वैराइटियों की बुवाई अप्रैल के प्रथम पखवारे से दुसरे पखवारे तक कर सकते है | जबकि अमेरिकन वैराइटियों की बुवाई 15 अप्रैल से मई के प्रथम सप्ताह तक की जाती है |

कपास में कौन सा खाद डालें ?

कपास की फसल में खाद एवं उर्वरको का प्रयोग जरूरी है नहीं तो उत्पादन मे कमी आ सकती है | खाद एवं उर्वरको का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना चाहिए यदि मृदा में कार्बनिक तत्वों की कमी हो तो उनकी पूर्ति करे | खेत तैयारी के समय आखिरी जुताई में कुछ मात्रा गोबर की खाद सड़ी खाद में मिलाकर प्रयोग करना है |

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रासायनिक खाद मे 60 किलो ग्राम नाइट्रोजन तथा 30 किलो ग्राम फास्फोरस तत्व का प्रयोग कर सकते है |

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कपास का खेत की तैयारी ?

खेत मे नमी का होना जरूरी है इसके लिए सिंचाई पानी / पलेवा करके पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से 15-20 सेंटीमीटर गहरी करनी है |

देशी हल या कल्टीवेटर से 2-3 जुताई करके खेत को अच्छी तरह भुरभुरा बना ले | खेत को समतल करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए |

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कपास की बुवाई में बीज की मात्रा ?

कपास की अगल-अलग बाजार मे मिलती है तथा किसान को बीज की किस्म के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बीज की मात्र का प्रयोग करना चाहिए | जिससे कपास का पौधा का फैलाव और विकाश अच्छा हो | औषत बीज लागत की बात करें तो –

कपास की किस्मों के आधार पर बीजदर अलग-अलग मात्रा में लगती है –

  1. देशी प्रजातियों में 12-15 किग्रा प्रति हेक्टेयर (रेशा रहित )
  2. अमेरिकन प्रजातियों में 18-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर (रेशा रहित ) है |

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कपास की फसल में निराई गुड़ाई ?

हल्की निराई गुड़ाई पहली सिचाई अर्थात 35 से 40 दिन से पहले करनी चाहिए इसके पश्चात फसल बढ़वार के समय गुड़ाई करनी चाहिए | कपास का फूल व गूलर बनने पर खुर्पी द्वारा खरपतवार गुड़ाई करते हुए निकलना चाहिए जिससे की फूलो व गुलारो को गिरने से बचाया जा सके |

कपास की खेती कैसे करें | कपास की खेती की जानकारी

कपास की छटाई / प्रुनिग ?

अधिक वर्षा/बरसात के कारण सामान्यत पौधों की ऊंचाई 1.5 मीटर से भी ज्यादा हो जाती है, जिससे उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है | इसलिए 1.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले कपास का पौधा की ऊपर वाली सभी शाखाओ की छटाई, केची / सिकेटियर से कर देना है |

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कपास के रोग और दवा ?

कपास की फसल में मुख्य रूप से शाकाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल ब्लाइट) तथा फफूंदी जनित रोग लगते है | इन रोंगों के बचाव हेतु खड़ी फसल में वर्षा प्रारम्भ होने पर 600 -800 लीटर पानी में घोलकर- 1.25 ग्राम कापर-आक्सीक्लोराईड 50% घुलनशील चूर्ण व् 50 ग्राम एग्रीमाईसीन या 7.5 ग्राम स्ट्रेपटो-साइक्लीन प्रति हेक्टर की दर से यह कपास की दवा देना है |

कपास की फसल मे ये दो छिडकाव 20 से 25 दिन के अन्तराल पर करना चाहिए | सामान्य रोंगों से बचने लके लिए उपचारित बीजो का ही बुवाई हेतु प्रयोग करे |

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कपास की चुनाई ?

कपास की चुनाई किस्मों के हिसाब से की जाती है चुनाई सुबह की हल्की ठंड मे पूर्ण खिले हुए गुलारो से करनी चाहिए | देशी कपास की चुनाई 10-12 दिन के अन्तराल पर तथा अमेरिकन कपास की चुनाई 18 से 20 दिन के अन्तराल पर होती है |

जहा तक हो सके कपास साफ सुथरी रखनी चाहिए | कपास का भण्डारण करने से पहले चुनी गई कपास को अच्छी तरह से सुखा लेनी है | अच्छी तरह सुखी कपास को भण्डार में रखे |

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kapas की प्रति हेक्टेयर पैदावार ?

कपास की उपज निर्भर करती है खेती की देखरेख, मौसम, कीट रोंग, कपास की किस्म/ प्रजातियों आदि पर | औसत पैदावर देखे तो देशी कपास में 15-18 क्विंटल/हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है |

तथा अमेरिकन कपास में 25-30 क्विंटल/हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है |

भारत में कपास की खेती कहां होती है ?

भारत देश में सबसे ज्यादा कपास की खेती महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, राज्य में होती है |

कपास सबसे अधिक कहाँ होता है?

कपास की खेती सर्वोधिक देश में महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, राज्य में होती है |

कपास की खेती कौन से महीने में की जाती है?

देशी वैराइटियों की बुवाई अप्रैल के प्रथम पखवारे से दुसरे पखवारे तक कर सकते है | जबकि अमेरिकन वैराइटियों की बुवाई मध्य अप्रैल से मई के प्रथम सप्ताह तक की जाती है |

कपास की खेती के लिए सबसे उचित मिट्टी कौन सी है?

kapas ki kheti लगभग सभी मिट्टी मे सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है | लेकिन बलुई, क्षारीय एवम जल भराव वाली भूमि में कपास की खेती के लिए सही नहीं है काली दोमट, दोमट-मटियार भूमि सर्वोत्तम होती है |

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