[ कुसुम की खेती कैसे की जाती है 2023 ] जानिए – कुसुम का पौधा, बीज का भाव, उत्पादन, पैदावार, कमाई – Safflower Farming In Hindi

Last Updated on December 29, 2022 by krishi sahara

हमारे भारत देश में कई प्रकार की मुनाफेदार फसलों की खेतियाँ की जाती है, उन्ही में से एक कुसुम की खेती है| कुसुम की फसल एक औषधीय फसल है, इसका बीज, छिल्का, पत्ती, तेल और शरबत, दवाइयां आदि बनाने में किया जाता है विश्व में हमारा भारत देश कुसुम का मुख्य उत्पादक देश है कुसुम की खेती मुख्य रूप से तिलहन फसल के रूप में इसकी फसल की जाती है |

कुसुम-की-खेती

इस लेख में आपको कुसुम की खेती से संबंधी सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी जैसे की – कुसुम की खेती कैसे की जाती है? कुसुम फसल क्या है? kusum के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी? कुसुम की कटाई कब की जाती है? कुसुम के बीज का भाव ? कुसुम के बीज? केसर और कुसुम में अंतर? कुसुम की खेती कब की जाती है? आदि विषयों पर आज हम विस्तार से चर्चा करेंगे –

कुसुम की फसल क्या है ?

कुसुम को आम-तौर पर कुसुम्भ के नाम से भी जाना जाता है, कुसुम की फसल सबसे पुरानी तेल वाली फसल है इस फसल में 35% तक का तेल होता है |

कुसुम फसल का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है और इसका उपयोग पशुओं के लिए खल के लिए उपयोग किया जाता है |

कुसुम की खेती कैसे की जाती है?

कुसुम की खेती करना बढ़ा ही आसान है इसकी खेती रबी के सीजन में की जाती है कुसुम की खेती की खेती करने के लिए जल निकान का होना जरूरी है ज्यादा समय तक खेत में पानी रोकने से भी फसल खराब हो सकती है |

बुआई से पहले आपको खेत की गहरी जुताई कर लेनी है और फिर आपको खेत को समतल कर देना है ताकि बीज ज्यादा गहराई में न जाए, सिंचाई के दौरान खेत में पानी न ठहरे इस प्रकार से आपको अपने खेत में सिंचाई करनी है |

कुसुम की खेती कब की जाती है?

कुसुम की खेती बारिश के मौसम के बाद, ठंड के मौसम में की जाती है अच्छे उत्पादन के लिए कुसुम फसल के लिए मध्यम काली भूमि से लेकर भारी काली भूमि उपयुक्त मानी जाती है यदि आप कुसुम फसल की उत्पादन क्षमता का सही लाभ लेने के लिए इसे गहरी काली मिट्टी में इस फसल की बुआई की है तो फिर इस फसल की जड़े जमीन में गहरी जाति है |

Kusum के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी?

कुसुम फसल विभिन्न प्रकार की भूमियों में उगाई जाती है बलुई भूमि कुसुम की फसल के लिए अधिक अनुकूल होती है यदि आप भी इस फसल की खेती करना चाहते है तो आपको सबसे पहले आपके खेत की मिट्टी की जांच कर लेनी है आपकी भूमि का पी.एच (pH) मान 6 से 8 के मध्य होना चाहिए |

मिट्टी अच्छी निकास वाली रेतली-दोमट और जैविक तत्वों की भरपूर मात्रा वाली मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है| निकली जमीन को जल जमाव से बचाए, क्योंकि सूखे और जड़ गलन जैसे रोग द्वारा आपकी फसल का नष्ट हो सकती है |

इसके अंकुरण के लिए 15 डिग्री तापमान होना चाहिए और पैदावार के लिए 25 डिग्री के आस-पास तापमान होना चाहिए इस फसल की बुआई समय रहते कर देनी चाहिए क्योंकि अधिक ठंड पड़ने से अंकुरण पर बुरा असर भी पड़ सकता है |

कुसुम फसल की सिंचाई कैसें करें ?

इस फसल को फुल लगने पर पानी की आवश्यकता होती है प्रथम सिंचाई आपको बुआई के 50 दिनों के बाद करना है और दूसरी सिंचाई आपको 85 दिनों के बाद करनी है| यदि बुआई के समय आपके खेत की मिट्टी में नमी कम हो तो बिजाई से पहले आपको एक बार सिंचाई कर लेनी चाहिए इससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी |

कुसुम की खेती कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती है, यह फसल एक सुखा सहनशील फसल है, यदि इस फसल का बीज एक बार अच्छे से उग आए तो इस फसल के काटने तक सिंचाई की आवश्यकता नही होती है परंतु फिर भी जहा सिंचाई उपलब्ध हो वहा अधिकतम 2 सिंचाई कर सकते है |

कुसुम का पौधा की देखरेख और सावधानियाँ ?

  • पौधे को आडू का हरा चेपा नामक किट से बचाना होगा यह पौधे को कमजोर करता है और गहराई से सुखा देता है |
  • मुरझाना और सड़ना यह एक ऐसी बीमारी है जिसमे पौधे पीले पड़ जाते है फिर भूरे हो जाते और फिर अंत में मर जाते है| किसानों को इन बीमारियों का भी ध्यान रखन होगा |
  • कुसुम की फसल समय-समय पर खरपतवार और सिंचाई करना आवश्यक है |
  • कुसुम का तेल मनुष्यों द्वारा खाने में सर्वाधिक प्रयोग में लिया जाता है, कुसुम के तेल में अम्लो की मात्रा 75% तक की होती है इसमें प्रमुख रूप से लिनोलिक अम्ल होता है |
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कुसुम की कटाई कब की जाती है?

कुसुम की कटाई 15 से 25 मई के मध्य होती है, कुसुम की फसल को तैयार होने में 150 से 175 दिनों का समय लगता है इसकी कटाई फुल पीले भूरे रंग के होने पर इसकी कटाई की जाती है |

कुसुम फसल की प्रति हेक्टेयर और एकड़ पैदावार ?

कुसुम फसल की पैदावार ओसतन 15 कुंटल प्रति हेक्टर तक की होती है तथा 45 से 50 कुंटल प्रति एकड़ की पैदावार होती है| इससे किसान को इसकी खेती से अच्छा लाभ प्राप्त होता है|

केसर और कुसुम में क्या अंतर है?

केसर और कुसुम में अंतर जो कुछ इस प्रकार है –

केसरकुसुम
केसर के फुल में 3 कलिया होती है जिसका रंग लाल होता है|कुसुम के फुल में 2 शाखा वाली आनेक कली होती है जिसका रंग लाल तथा पीला होता है|
केसर की खेती केवल कश्मीर में होती है|कुसुम की खेती भारत देश में कही भी हो सकती है|
केसर के पौधे की ऊंचाई आधे फिट से अधिक नही होती है|कुसुम के पौधे की ऊंचाई 5 फीट से भी ज्यादा हो सकती है|
केसर के बीज नही होते है, इसकी बुआई कंद के माध्यम से की जाति है|कुसुम के बीज होते है|

कुसुम की खेती के मुनाफा, कमाई ?

कुसुम की खेती करके आप अच्छा लाभ कमा सकते हो क्योंकि इस फसल की डिमांड बाजार में अच्छी खासी है जिसके कारण बाजार में इसका भाव भी है यदि आप एक एकड़ में भी इसके खेती करते है तो आप प्रति एकड़ 2 लाख रुपए का लाभ कमा सकते है |

कुसुम के बीज का भाव ?

कुसुम के बीज का भाव 3 से 4 हजार रुपए प्रति कुंटल होता है, इस फसल की बाजार में अधिक डिमांड है| आपके क्षेत्र के अनुसार नजदीकी मंडी में इसका भाव ऊपर नीचे होता रहता है |

कुसुम के फूल का क्या भाव है ?

वर्तमान समय में कुसुम के फूल भाव 6 हजार से 8 हजार रुपए प्रति कुंटल है, बाजार में इसके बीज और इसके फुल दोनो की अच्छी डिमांड है |

कुसुम का पौधा कैसा होता है?

इसके पौधे के फुल का रंग लाल तथा पीला होता है इसकी ऊंचाई 30 से 150 सेंटीमीटर तक की होती है इसके फुल का आकार गोलाकार होता है|

कुसुम के बीज कैसे होते हैं ?

कुसुम के बीज का रंग हल्का लाल, पीला होता है, यह दिखने में धान जैसा होता है |

कुसुम का बीज क्या भाव बिकता है?

कुसुम का बीज का भाव 3 से 4 हजार रुपए प्रति कुंटल के आस-पास होता है |

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