[ मटर की खेती 2023 ] यहाँ जानिए पैदावार, खाद, बीज, बुवाई मटर की उन्नत किस्में – Matar Farming in Hindi

Last Updated on November 24, 2022 by krishi sahara

मटर की खेती | मटर के बीज का रेट 2022 | मटर में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें | मटर की वैरायटी | मटर का बीज उपचार | मटर की उन्नत किस्में | मटर की फसल के रोग | सब्जी वाली मटर की खेती | मटर की सिंचाई | मटर की किस्में | मटर की खेती का बुवाई का समय | मटर की वैज्ञानिक खेती

बात करेंगे मटर की खेती के बारे में तो सर्दियों के मौसम में मटर की डिमांड बहुत ज्यादा होती है जिसके कारण भारतीय कृषि बाजारो और किसानों को मटर के अच्छे भाव मिल जाते है | और इसी के चलते किसान मटर की खेती कर कम समय में अधिक लाभ कमा सकते है| आइए इस लेख के माध्यम से मटर की खेती की संपूर्ण जानकारी जानते हैं –

मटर-की-खेती

किसानों के लिए मटर की खेती करना बहुत ही फायदेमंद होती है क्योंकि एक तो मटर की फसल अन्य सब्जी फसलों / सब्जी की खेती के मुकाबले लागत कम लगती है और दूसरा कम समय में ही तैयार हो जाती है | इससे किसानों को मुनाफा भी अच्छा मिल जाता है | आइए जानते हैं खेती की तैयारी से उत्पादन तक  मटर की खेती की पूरी जानकारी –

मटर के पौधे वैज्ञानिक नाम-

मटर के पौधे वैज्ञानिक नाम – Pisum sativum

उपयुक्त मिट्टी –

लवणीय और उसर भूमि मटर की फसल मे उपयुक्त नहीं मानी जाती है वैसे किसान को सावधानी बरतते मिट्टी की जांच (मृदा परीक्षण) करवा लेना चाहिए | हरे मटर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी के लिए बात करे तो इसकी खेती के लिए मटियार-दोमट, मटियार-लाल भूमि की मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है | जिस का पीएच मान 6 से 7.5 PH मान होना अति उत्तम है |

तापमान और जलवायु –

मटर की खेती के लिए शीत और नम जलवायु अच्छी मानी जाती है | सर्दी के या ठंड के मौसम प्रारंभ में ही की खेती की जाती है क्योंकि उस समय तापमान 20 से 22 डिग्री सेंटीग्रेड होता है | तथा 10 से 15 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर है मटर की फसल की पैदावार अच्छी होती है तथा इस तापमान पर बढ़वार भी अच्छी होती है | वेसे किसान अपनी इच्छानुसार वातावरण यानि नेट हाउस के अंदर मटर की खेती कर सकता है |

बुवाई का समय –

मटर की बुवाई का उत्तम समय 10 अक्टूबर से 10 नवंबर के मध्य सही समय माना जाता है| यानी मटर की अक्टूबर-नवंबर में बुवाई कर सकते है | लेकिन देश में अनेक क्षेत्रों के किसान अगेती फसल लेने के हिसाब से सितंबर महीने में ही मटर की बुवाई कर देते हैं जल्दी बुआई करने से मटर की फसल के रोग लगने की संभावना ज्यादा रहती है और किसान को ज्यादा खाद उर्वरक की जरूरत पड़ती है और उत्पादन भी कम होता है लेकिन बाजार में जल्दी मटर पहुंचाने से उसके भाव अच्छे मिल जाते है |

मटर-की-खेती

खेत की तैयारी कैसे करे –

मटर की खेती के लिए किसान को मिट्टी पलटने वाले कृषि यंत्र से मिट्टी को पलटा ले और इसके बाद 2 से 3 बार सामान्य हल की सहायता से जुताई करके खेत को अच्छी तरह से तैयार करा लेना चाहिए |

मटर का बीज उपचार –

मटर की खेती के लिए बीजों उपचार करना बहुत ही जरूरी है और ये आज के समय करना जरूरी भी हो गया है | अलग-अलग सब्जी-फसल की खेती मे बीज उपचार के लिए अलग-अलग दवा का प्रयोग होता है | मटर की खेती मे बीज का उपचारित करने के लिए राइजोबियम या लेग्यूमिनोसेरम कल्चर का उपयोग कर सकते है |

बुआई मे पोध से पौध की दूरी –

मटर को लगाने का तरीका क्या है यानी पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25 से 35 सेंटीमीटर की होनी चाहिए | पौध से पौध की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए | मटर के बीज की गहराई की बात करे तो 4 से 6 सेन्टीमीटर की गहराई में बुआई कर सकते है |

मटर-की-खेती

प्रति हेक्टर मटर के बीज –

बात करें किसान को प्रति हेक्टर बीज की आवश्यकता की तो इसके लिए औसतन 90 से 110 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है | तथा किसान यदि लेट या कुछ पछेती मटर की खेती करना चाहते है तो इसके लिए 120 से 130 किलोग्राम मटर का बीज की आवश्यकता होती है |

मटर की वैरायटी / मटर की उन्नत किस्में –

किसान को मटर की खेती करने से पहले सबसे जरूरी बात होती है की उपयुक्त मटर बीज का चयन | देश मे मटर की खेती दो उद्देश्य से करते है – 1. फील्ड मटर की खेती 2. गार्डन मटर की खेती

फील्ड मटर गार्डन मटर
मटर की राइटिंग को हम उपयोग में साबुत मटर दाने व चारे के लिए उपयुक्त हो इसमें काम में उपयोग किया जाता है |इस प्रकार की वैरायटी में मटर की खेती सब्जियों के लिए की जाती है |
इसके लिए प्रमुख किस्में हैं रचना, स्वर्णनखा, अपर्णा, हंस, जेपी-885, विकास, पारस, अविका आदि |जैसे- आर्केल बोनेविले अर्ली बैजर, अगेती , पंत उपहार T-9, T-56, NP-29 आदि |
मटर-की-खेती

 देश मे प्रचलित प्रमुख मटर की उन्नत किस्में –

बौनविले 
हरियाल
असौजी 
PSM3 Hybrid
विकाश 99-13
अंकुर सीड्स आस-10
TATA DHANYA मटर 
UPL गोल्डन GS- 10
आदर्श 99-15
मालव
आजाद 
अरलीबैजर
पन्त उपहार 
आर्किल 
पेंसिल मटर

मटर की सिंचाई कैसे करें ?

मटर की खेती मे सिर्फ 2 सिचाई की आवश्यकता पड़ती है जो एक फूल आते समय तथा दूसरी मटर के दाने बनते समय | मटर की फसल में शीतकालीन वर्षा हो जाने पर दूसरी सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है | पहली सिंचाई मटर की खेती में पौधों में फूल निकलते समय था दूसरी सिंचाई के पौधों पर दाना बनते समय करते हैं यानी मटर को 35 से 40 दिन बाद दूसरी सिंचाई करते हैं | मटर की खेती में हमेशा हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ती है जब भी सिंचाई करें ज्यादा सिंचाई ना करें |

मटर के बीज का रेट 2022 ?

किसान भाइयों मटर के बीज के भाव की बात करे तो यह बात बीज के चुनाव पर निर्भर करती है | सभी तरह के बीज शोध कम्पनीयो के भाव अलग-अलग होते है, वैसे औसतन मटर के बीज के भाव 180-250 रुपये पर किलो यानि 1800 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजारों मे सामान्यतः मिल जाता है |

मटर की फसल के प्रमुख रोग ?

मटर-की-खेती

मटर में लगने वाले रोग और कीटों की बात करें तो मटर की खेती में दो प्रकार की रोग संबंधित समस्याएं देखने को मिलती है एक तो जड़ गलन और दूसरा है तना गलन | इन दोनों समस्याओं का निवारण है कि मटर की खेती करने से पहले ही इसका उपचारित कर लिया जाए तो इस प्रकार की समस्या देखने को नहीं मिलती है | मटर की फसल के प्रमुख रोग –

उकठा रोग

यह रोंग मटर की खेती मे मुख्यत होता रहता है और किसान इस रोग से ज्यादा प्रभावित हो सकते है | यह रोंग इस फसल मे किसी भी अवस्था मे हो सकता है इसलिए इसके लक्षणों को पहचान कर उपाय करने मे फायदा है | इस रोंग मे मटर का पौधा धीरे-धीरे मुरझा कर सुख जाता है और पौधे की जड़ो मे भूरे रंग की धारिया पड़ जाती है | इस रोंग से बचने के लिए किसान को खेत के बीज को उपचरित करे, मृदा परीक्षण करके बुआई करे, इस रोंग से अवरोधी प्रजाति के बीजों की बुआई करे |

पत्ती धब्बा रोग

इस रोग मे मटर के पौधे की पत्तियो मे गोलाकार धब्बे बन जाते है | ये गोल धब्बे पूरी पत्ती मे फेल जाते है और धीरे धीरे पूरे पौधे सुख जाते है | इस रोग से बचाव के लिए कापर आक्सीक्लोराइड 50 % , W. P. 3.0 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पानी मे घोलकर छिड़काव करे |

बुकनी रोग :-

बुकनी रोंग मे मटर के पौधे की पत्तियों, फलियों, टहनियों पर सफेद रंग का पाउडर जैसा चूर्ण फेलता जाता है ओर अंत मे पौधे को पूरा सुखा देता है |

मटर के बीज को उपचारित करने केसाथ-साथ रोंगों बचने के लिए थिरम, कैप्टान व वाविस्टीन से भी मटर बीज को उपचारित कर सकते है |

भारत की सबसे बड़ी मटर मंडी कहाँ है ?

मटर की सबसे बड़ी मंडी भारत में आजादपुर पंजाब मे है जो भारत की ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की सबसे बड़ी सब्जी और फल की मंडी है |

मटर कितने दिन में तैयार हो जाता है?

मटर की खेती 60 से 70 दिनों के अंदर पककर तैयार हो जाती है इस फसल में किसानों को लगभग 80 से 95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज ले सकता है |

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