[ जौ की उन्नत किस्में 2022 ] देश की टॉप 10 जौ की विशिष्ट बीज प्रजातियां,जानिए उत्पादन और मुनाफा – Barley Varieties

Last Updated on September 9, 2022 by [email protected]

जौ की उन्नत किस्में | Top Barley Varieties in hindi | जौ की कौन सी किस्म सबसे अच्छी होती है | जौ की विशिष्ट प्रजातियां चयन क्यों करना चाहिए | जौ उत्पादन में प्रथम राज्य कौन सा है | जौ कितने प्रकार के होते हैं | जौ का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन कितना होता है ?

यदि आपको खेती में लाभ कमाना है तो सबसे पहले आपको एक अच्छी फसल का चयन करना आवश्यक है यदि आप अच्छी फसल का चयन है और एक अच्छे बीज का चयन करना है तो आप अपनी खेती में सफल हो सकते है। यदि आप यह दो कार्य अच्छे से करते हो तो आपको अपनी खेती में अवश्य ही मुनाफा होगा, आज का हमारा यह लेख इस विषय पर ही है।

जौ-की-उन्नत-किस्में

इस लेख में आपको देश की टॉप 10 जौ की विशिष्ट बीज प्रजातियां, जौ की सिंचाई करने का नया तरीका, इसमें कौन सी दवाई का प्रयोग करना चाहिए जिससे जौ पैदावार अधिक हो? इस सभी विषयो की जानकारी हम अपको विस्तार से देंगे। कृपया इस लेख को अंत तक पूरा अवश्य पढ़े।

बहुत से किसान जौ की खेती करना चाहते है पर उनके पास प्रयाप्त पानी नही होने पर वो जौ की खेती नही कर पाते है। क्योंकि किसानो का ऐसा मानना है की इस खेती के लिए ज्यादा पानी चाहिए परंतु यह बात पूरी तरह से सही नही है। बाकी सभी फसल से यदि हम जौ की खेती से तुलना करे तो, जौ की खेती कम पानी में भी अच्छी हो सकती है और अन्य फसलों से ज्यादा लाभ भी दे सकती है।

जौ की उन्नत किस्में 2022 ?

जौ की कई ऐसी उन्नत ओर प्रमाणित बीज किस्में है जो आज के समय देश मे सर्वाधिक प्रचिलित भी है –

किस्म का नामबीज की विशेषता, उपज – उत्पादन
ज्योति / 0572-10जौ की यह वैराइटी सिंचित भूमि मे देरी से बुवाई के लिए अच्छी मानी जाती है | कण्डुवा एवं स्टइप जैसे रोगो के प्रति काफी सहनशील | फसल फसल पकने की अवधि 120 से 125 दिनों की है| जौ ज्योति किस्म की पैदावार – 25 से 28 क्विंटल/ हेक्टेयर के आस-पास मानी जाती है|
BH – 902सामान्य किस्मों मे एव विषम परिस्थति मे यह किस्म रतुआ और झुलसा रोगों के प्रति उच्च सहनशील प्रजाति है | उत्पादन की बात करें तो 18-20 कुंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ले सकते है|
आजादआजाद किस्म का जौ बीज बिना सिंचाई वाली ऊसरीली भूमि मे काफी अच्छे से फलने-फूलने वाली किस्म है | यह वैराइटी चारा तथा दाना के लियें ज्यादातर बोई जाती है | कण्डुआ रोग के प्रतिरोधी जो, 110 से 115 दिन पककर तैयार हो जाती है | उपज पैदावार क्षमता 28 से 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मानी जाती है|
मंजुलामंजुला जौ की पछेती किस्म है, जो नीलाभ, कण्डुआ के रोगप्रतिरोधी, ज्यादातर मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुमोदित | फसल पकने की अवधि 110 से 115 दिन की है | उपज पैदावार की बात करें तो 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आकी जाती है|
रेखा /BSU- 73बीज के बीज दो धारीय, सिचित दशा मे फल-फूलती है, जो पूर्ण रोग प्रतिरोधी| फसल 120 से 125 दिन मे पककर तैयार हो जाती है | 40 से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज आकी जाती है|
जौ किस्म लखनइसे बाजार मे “के- 226” के नाम से भी जाना जाता है, बिना सिंचाई पानी के भी अच्छी ग्रोथ ओर उपज देने मे काफी बेहतर साबित हो रही है | 110 से 115 दिन मे पककर तैयार होने वाली इस किस्म की औसत पैदावार 30 से 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है|
गीतांजली“के- 1149” नाम से जानी-मानी जौ की यह वैराइटी बिना सिंचाई की दशा मे कई प्रकार के रोगों के प्रति सहनशील है | इस किस्म की जौ फसल 95 से 100 दिन मे पककर तैयार होती है, जो जल्दी पकने वाली किस्मों मे से एक है | उपज क्षमता की बात करें तो 25 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार है|
नरेंद्र जौ-1, 2 और 3देश के मैदानी क्षेत्रों की हल्की ओर कम उपजाऊ ऊसर भूमियों के लिए उपयुक्त बेहतर किस्म है | उपज की बात करें तो 25 से 30 क्विंटल/ हेक्टेयर तक देती है | इस किस्म मे गेहूंआ, कण्डुआ एवं स्ट्राइप रोग देखने को नहीं मिलता है | फसल पकाव की सामान्य अवधि 110 से 115 दिन की है |
NDB -1173जौ की इस वैराइटी को सिचित ओर असिंचित दोनों परिस्थति वाली जगहों पर बोया जा सकता है | हल्की एवं ऊसर मिट्टी क्षेत्रों हेतु अच्छी किस्म मानी गई किस्म है | फसल की उपज पैदावार क्षमता 35 से 45 क्विंटल/हेक्टेयर है|
हरीतिमा जौ किस्मइस वैराइटी को K-560 के नाम से भी जाना जाता है | बिना सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर प्रजाति है | फसल का जीवन काल 110 से 115 दिन का है | प्रति हेक्टेयर औसत उपज 30 से 35 मानी गई है|
प्रीति/के- 409अच्छी सिंचाई व्यवस्था मे फलने-फूलने वाली इस किस्म को अधिक पैदावार लेने के लिए बोया जाता है | इस वैराइटी की उपज क्षमता 38 से 42 क्विंटल /हेक्टेयर है| लगभग सभी प्रकार की प्रमुख बीमारियों के प्रति सहनशील किस्म | फसल पकने की सामान्य समयावधि 105 से 112 दिन की है |
जागृति जौ अनाजबाजार मे इस बीज किस्म को “K-287” के नाम से भी जाना जाता है | सिंचित सुविधा मे फलने-फूलने वाली इस किस्म मे कण्डुआ रोग नहीं आता है | देश के सर्वोधिक मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना गया है | फसल पकने की अवधि 125 से 130 दिन की है ओर उपज 42 से 45 क्विंटल/हेक्टेयर ली जा सकती है|
जौ की उन्नत किस्में 2022-23

जौ की विशिष्ट प्रजातियां चयन क्यों करना चाहिए ?

यदि आप जौ की खेती कर रहे है या फिर करना चाहते तो आपको जौ की विशिष्ट प्रजातियां चयन करना चाहिए है। क्योंकि कुछ प्रजातिया ऐसी भी पाई जाति है, जो केवल मौसम के ऊपर भी निर्भर करती है। कुछ किस्म सर्वाधिक ठंड के समय अच्छी होती है और सर्वाधिक गर्मी में अच्छी होती है।

जौ का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन कितना होता है ?

अलग अलग प्रजातियों का उत्पादन प्रतिशत अलग है फिर भी यदि हम, वैराइटियों के औसत आकड़ों के अनुसार जौ का प्रति हेक्टर औसत उत्पादन देखे तो वह 24-27 कुंटल प्रति हेक्टेयर है | उत्पादन का औसतआपकी भूमि / खेत और मौसम पर निर्भर करता है|

जौ अनाज की सिंचाई को लेकर प्रमुख बाते ?

यदि आप जौ की खेती कर रहे तो उसकी सिंचाई नियमित समय में करे ऐसा नही की जब चाहे जौ की सिंचाई कर दे इससे आपकी फसल खराब हो सकती है।

सबसे पहले आपको जौ उत्पादन के लिए खेत की मिट्टी अच्छे से जुताई कराके तैयार कर ले फिर आप इसमें जौ की बुआई कर दे। बुआई के ठीक 25 दिन से 30 दिन बाद ही आप इसकी सिंचाई करे न इससे पहले और न इसके बाद, दिए गए समय में ही सिंचाई करे।

40 दिन से 45 दिनों के बाद आपको दूसरी सिंचाई जौ की कर देनी है और तीसरी सिंचाई जौ में फुल आने के बाद शुरू कर देनी है फिर कुछ दिन बाद आपको पांचवी सिंचाई भी पूरी कर देनी है।

जौ की कौन सी किस्म सबसे अच्छी होती है?

मुख्यतः बता दे की जौ प्रजातियों का चयन करना आपके शेट की जलवायु, मिट्टी, सिचाई पानी, देखरेख आदि पर निर्भर करता है, किसान को सबसे अच्छी किस्म का चुनाव मिट्टी की जाँच कराकर, अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से पूछकर किस्म का चुनाव करना चाहिए | अधिक उत्पादन की द्रष्टि से जौ की सबसे अच्छी किस्म – जाग्रति, प्रीति, NDB, हरीतिमा आदि उन्नत किस्में है जो 35+क्विंटल/हेक्टेयर उपज पैदावार देती है |

प्रमुख जौ की किस्म राजस्थान मे प्रचलित है ?

प्रमुख जौ की किस्म राजस्थान मे प्रचलित है, वह किस्मे जागृति, लखन, मंजुला, ज्योति राजकीरण और R.S- 6, आजाद, के-15, हरीतिमा, प्रीति, नरेंद्र जौ-1,2 और 3, के-603, एनडीबी-1173 |

जौ कितने प्रकार के होते हैं?

जौ उपयोग ओर बुवाई के अनुसार कई प्रकार की मानक ओर प्रमाणित बीज किस्मों मे मिलता है | दुनिया भर मे देखे तो मुख्यतः दो प्रजातिया, जिसमे पहली “होरोडियम डिस्टिन” प्रजाति सर्वाधिक मध्य अफ्रीका में पाई जाति है। जौ की दूसरी प्रजाति “होरडिम वालगेयर” इस किस्म की खेती सबसे ज्यादा यूरोप की किसान करते है।

जौ उत्पादन में प्रथम राज्य कौन सा है, खेती कहाँ-कहाँ होती है ?

जौ उत्पादन में प्रथम राज्य उत्तर प्रदेश है, ओर देशभर मे इसकी खेती राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे ओर भी अन्य राज्यो में की खेती होती है।

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